शहर में नागरिकता कानून के विरोध में सड़क पर उतरे लोग संविधान बचाओ के लगे नारे

 

  खबर नेशन / Khabar Nation

इंदौर। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर शहर के अलग-अलग क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रमुख प्रदर्शन सदर बाजार हज हाउस केम्पस पर मुफ़्ती-ए-मालवा मौलाना नूरुल हक़ नूरी की अगुवाई में हुआ। उन्होंने जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा केन्द्र द्वारा पारित नागरिकता संशोधन विधेयक काला कानून है और इससे पूरा देश चिंतित है क्योंकि इससे हिंदुस्तानी तहज़ीब को ख़तरा है। उन्होंने कहा कि भारत देश महान देश है इसमें सभी धर्मों के लोगों को रहने का अधिकार है। इस देश में मुस्लिमों ने अंग्रेजों से लड़कर आजादी दिलाई है।लिहाज़ा देश को बांटने वाले इस तरह के काले कानून को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संबोधन के बाद एसडीएम राकेश सिंह सिन्हा को मुफ़्ती नूरूलहक़ नूरी साहब, हाफ़िज़ सैयद इख़्तियार अली, पार्षद अनवर क़ादरी,पार्षद अनवर दस्तक सहित बड़ी संख्या में समाजजनों की मौजूदगी में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। यहां प्रदर्शन अनूठे अंदाज़ में हुआ। जिसकी शुरुआत तिलावते क़ुरआन से हुई और समापन पर सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा कौमी तराना पढा गया। जूना रिसाला की संस्था नूरी फाउंडेशन के अब्दुल मलिक ने बताया कि नागरिकता संशोधन के खिलाफ़ सदर बाजार पर अनुशासन के साथ शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया गया।जिसमें,बड़वाली चौकी,सिकन्दराबाद, जूना रिसाला, मल्हार पलटन,जूना पीठा,सदर बाजार,भिश्ती मोहल्ला छीपा बाखल,गफूर खां की बजरिया,इक़बाल कॉलोनी आदि क्षेत्र से मुस्लिम व अन्य समाजजन हाथों में तिरंगे लिए संविधान बचाओ के नारों के साथ बड़ी संख्या में  जमा हुए। सीएए और एनआरसी के विरोध में शहर के 6 इलाक़ों में  विरोध जताया गया। सुबह खजराना, संयोगितागंज, मल्हारगंज, चंदन नगर,सदरबाजार,पंढरीनाथ थाना सहित 6 स्थानों पर कुछ संगठनों ने प्रदर्शन कर पुलिस-प्रशासन के अफसरों को ज्ञापन सौंपा। हाथों में तिरंगा लिए इन लोगों ने संविधान बचाओ के नारे लगाए। सभी समुदाय के लोगों ने इसमें शिरकत कर देश में एकता और अखंडता की बनाए रखने की कही। मुस्लिम धर्म गुरुओं के साथ संत समाज भी इसमें शामिल हुए। सीएए और एनआरसी के खिलाफ चलाए गए हस्ताक्षर अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर किए।विरोध स्वरूप राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र के मुताबिक, शांतिपूर्ण तरीके से बात रखने पर कोई रोक नहीं है। फिर भी एहतियात के चलते 700 जवान तैनात किए थे।

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