शिव नाम की लूट है लूट सके तो लूट, अंतकाल पछताएगा जब सत्ता जाएगी छूट
प्रक्रिया को हर पल तोड़ता मध्य प्रदेश का माध्यम
3 साल बाद पहला टेंडर मन मुताबिक शर्तों का किसके लिए और किसके द्वारा ?
प्रधानमंत्री मोदी को शिकायत की तैयारी
गौरव चतुर्वेदी / खबर नेशन / Khabar Nation
शिव नाम की लूट है लूट सके तो लूट
अंतकाल पछताएगा जब सत्ता जाएगी छूट
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का प्रिय विभाग जनसंपर्क और उसका एक अंग मध्यप्रदेश माध्यम इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है । आइए हर सप्ताह एक मंत्री और उसके एक विभाग की काली करतूतों का चिट्ठा खोलें । शुरुआत मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विभाग से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास सामान्य प्रशासन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास विभाग ,विमानन, महिला एवं बाल विकास और पीएचई जैसे भारी-भरकम विभाग हैं। सरकार चलाने की व्यस्तता के चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन विभागों में पदस्थ अधिकारियों को फ्री हैंड दे रखा है। जिसका अधिकारियों द्वारा भरपूर दोहन किया जा रहा है ।
बात माध्यम की मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग के अधीन माध्यम सरकार के इवेंट को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के नाम पर लूट का अड्डा बन गया है। विगत 3 सालों में इवेंट के नाम पर लगभग 400 करोड रुपए फूंक दिया गया ।
सूत्रों के अनुसार चुनावी वर्ष होने के कारण इस साल सभी विभागों से प्रचार का पैसा भी जनसंपर्क ने ले लिया। हाल ही तक माध्यम के इवेंट सिर्फ दो एजेंसियों (जो आपस में घुली मिली है) के जिम्मे था। इन्हें बाले बाले मन मुताबिक काम दिए जा रहे थे। उक्त दो एजेंसियों को पूरे कामों का लगभग 80 प्रतिशत कार्य दिया गया। जिसमें सरकार के 1- 2 रसूखदारों की भूमिका प्रमुख रही । इस मामले में मध्य प्रदेश शासन के द्वारा बनाए गए मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियम तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 (यथा संशोधित 2022) का खुला उल्लंघन किया जाता रहा।
अब हाल ही में पहली बार इवेंट के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया है। टेंडर में ऐसी शर्तों को जोड़ा गया है । जिसके चलते सिर्फ दो चहेती एजेंसियों को ही इसका लाभ मिल सकेगा। टेंडर में शर्त है किस साल में पांच करोड़ रुपए के कार्य करने वाली इवेंट मैनेजमेंट सेवा प्रदाय कर्ता ही आवेदन करें । उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व माध्यम सिर्फ दो ही इवेंट एजेंसियों को अधिकांश काम दे रहा था। जब शासन स्तर पर राजनेताओं में आपत्ति उठाई तो विवादों से बचने इंपैनलमेंट वाली अन्य संस्थाओं को काम दिया गया लेकिन वह भी ना के बराबर । ऐसी स्थिति में अन्य इवेंट एजेंसी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे और वह बाहर हो जाएंगे। टेंडर में यह शर्त भी जोड़ी गई है कि निविदा कर्ता को 5 साल का अनुभव होना चाहिए । इसी के साथ ही "ए" कैटेगरी के लिए राज्य सरकार ,केंद्र सरकार ,पीएसयू , सरकारी निगम - मंडल के एक करोड़ के कार्य का वर्क आर्डर होना चाहिए। मध्यप्रदेश में इंपैनल एजेंसियों को विगत 3 साल में जब काम ही नहीं दिया गया तो वह वर्क आर्डर कहां से लाएंगे। पूर्व की शर्तों में प्राइवेट सेक्टर के वर्क आर्डर को भी महत्व दिया जाता था। इस बार इसे हटा दिया गया है । निजी और कार्पोरेट क्षेत्र में कई कंपनियां बेहतर कार्य कर रही हैं। अगर माध्यम प्रायव्हेट सेक्टर में काम करने वाली एजेंसियों को साथ ले तो और बेहतर इवेंट आयोजित किए जा सकते हैं।
तकनीकी तौर पर अन्य संस्थाओं का उल्लेख किया गया है लेकिन मध्यप्रदेश में सभी सरकारी इवेंट माध्यम के द्वारा ही संपन्न कराए जा रहे हैं ।यह सारी कवायद कंजे मियां की भोपाल टेंट एवं ग्लास वर्क और विज्ञापन एजेंसी के तौर पर काम करने वाली श्रीराम पब्लिसिटी को लाभ पहुंचाने की नियत से की जा रही है । उन्होंने कहा कि माध्यम में चल रहे भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित केंद्र एवं राज्य की जांच एजेंसियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को भी करने की तैयारी की जा रहे हैं।
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गौरव चतुर्वेदी
खबर नेशन
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