बनेगी फिर शिवराज सरकार डॉ. मयंक चतुर्वेदी
खबरनेशन / Khabarnation
मध्यप्रदेश में चुनावी सर्वे को लेकर अब तक अनेक मीडिया सर्वे आ चुके हैं इनमें ज्यादातर सर्वे सूबे में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर की बात करने के साथ यह बता रहे हैं कि इस बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चौथी पारी सीएम के रूप में आसान नहीं और एक राजनीतिक पार्टी के रूप में भाजपा की स्थिति भी लगातार सत्ता में बने रहनेवाली पार्टी की सरकार के कारण से एंटी इंकम्बेंसी के घोर वक्त से गुजर रही है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, यहां भारतीय जनता पार्टी की मुश्किले कम होती देख रही हैं। लगातार शिवराज की जन सभाओं में जिस तरह से दिनों दिन जनता का उत्साह और उनकी संख्या बढ़ती हुई देखने को मिल रही है, उसके बाद यही कहना होगा कि वे सारे मुद्दे अब पीछे छूटते जा रहे हैं जिनको लेकर कल तक कर्मचारी संगठन से लेकर विपक्षी कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने का प्रयास करते रहे थे।
इस बार के चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान जिस संकल्प को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं, वह संकल्प ‘’समृद्ध मध्यप्रदेश’’ का है। समूची भाजपा इस संकल्प के साथ यह स्वप्न आगामी पाँच सालों में पूरा करने का वादा कर रही है कि प्रदेश की जनता उसे अपनी सरकार बनाने का मौका देगी तो इस बार उन तमाम चुनौतियों पर सीधा प्रहार किया जाएगा जिसके कारण से यह राज्य आज भी प्रगति के पथ पर देश के कुछ राज्यों से अब तक पीछे दिखाई दे रहा है। भाजपा के नेता विश्वास से भरे हुए हैं और कह रहे हैं कि पिछले साढ़े चार में केंद्र की मोदी सरकार के सहयोग से जितना अधिक कार्य शिवराज मध्यप्रदेश में करने में सफल रहे उतनी सहायता कभी भी केंद्र में कांग्रेस की सरकार के रहते हुए इस राज्य के लिए नहीं मिल सकी थी।
यही कारण है कि पार्टी ने भी अन्य नेताओं को चुनावी प्रचार के फोटो फ्रेम से हटाकर केवल शिवराज को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यहां चुनाव प्रचार का प्रमुख आधार बनाया है। संगठन स्तर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की फोटो हर ओर छाई हूई है। यहां सीधेतौर पर यही दिखाई दे रहा है कि भारतीय जनता पार्टी प्रध्यप्रदेश में शिवराज के काम और चेहरे के आधार पर चुनावी मैदान में है और उसे पूरा भरोसा है कि कैसी भी एंटी इंकम्बेंसी बाहर दिखाई देती हो लेकिन अंत में परिणाम उसी के पक्ष में आएंगे।
इस बार मुख्यमंत्री शिवराज का अंदाज भी कुछ अलग नजर आ रहा है, जहां भाजपा के सभी नेता कांग्रेस पर तीखे प्रहार कर रहे हैं, पर शिवराज भी अपनी ओर से कोई कोर-कसर छोड़ना नहीं चाहते। शायद यही कारण है कि वे चुटीली भाषा में कांग्रेसियों पर चुन-चुन कर हमले कर रहे हैं, उनके व्यंग्य इतने सधे और तीखापन लिए हुए हैं कि जोभी शिवराज को सुनने भाजपा की सभाओं में आ रहा है वह उनका ही होकर वहां से वापिस जा रहा है।
वस्तुत: देखाजाए तो कांग्रेस जिस तरह से प्रश्न खड़े करके प्रदेश में भाजपा सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है, उसके जवाब में भाजपा के सभी नेताओं का कहना है कि जितना कार्य पिछले 15 सालों में सत्ता में रहकर भाजपा की सरकार ने किया है, उतना कभी भी कांग्रेस की बरसों बरस की सरकार रहकर कभी नहीं किया। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर कहते हैं कि हमारी पार्टी ने शासन में रहते हुए युवाओं के उत्थान के लिए तमाम कार्य सफलता से किए हैं, वे कई योजनाएं हैं जिनके व्यवहार में आने के बाद से प्रदेश के युवाओं को अपना भविष्य संवारने की दिशा में नए मुकाम हासिल हुए हैं। महिलाओं और बुजुर्गों का भी खयाल और उनके सम्मान को बनाए रखने के कार्य में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार हमेशा से आगे रही है, चाहे तो आप आंकड़े उठाकर देख सकते हैं।
मतदान तारीख पास आने के साथ कम हो रही भाजपा की चुनौतियां
मध्यप्रदेश में मतदान का दिन जैसे-जैसे पास आता जा रहा है, आपस में उलझी कांग्रेस जहां अपने नेताओं के दिए बयानों से कमजोर होती जा रही है तो दूसरी ओर अब तक प्रभावी भूमिका में दिखाई दे रहीं सपाक्स और जयस का प्रभाव भी घटता नजर आ रहा है। प्रारंभ में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ने आदिवासी क्षेत्रो में इतनी तेजी से सक्रियता बढ़ाई थी कि कुछ समय के लिए लगने लगा था कि जयस कमल को इस बार सत्ता की कूर्सी से दूर कर सकता है लेकिन जैसे ही नेताओं का चुनावी प्रचार शुरू हुआ, वक्त बीतने के साथ जयस का प्रभाव कम होता दिखने लगा है, यही बात सवर्ण समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे संगठन ‘’सपाक्स’’ के बारे में कही जा सकती हैं। यह संगठन भी मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही अपना अस्तित्व समेटता नजर आ रहा है, ऐसे में यह भी भाजपा की कांटों भरी राह से उसे फूलों की राह पर ले जाता दिख रहा है।
कई रूठों को मनाने में सफल रहे शिवराज
भाजपा की उम्मीदवारों को लेकर जैसे-जैसे सूचियां आ रही थीं वैसे ही यह आरोप लगानेवाले कि भाजपा में उनका अब सम्मान नहीं की संख्या भी बढ़ती जा रही थी आलम यह था कि प्रदेश की 50 से अधिक विधानसभाओं पर बागियों ने अपना परचम लहरा दिया था जोकि बहुत भाजपा को सत्ता से दूर रखने का कारण बन सकते थे लेकिन शिवराज और संगठन ऐसे ज्यादातर बागियों को समझाने में कामयाब रहा। नाम वापसी के आखिरी दिन मुख्यमंत्री निवास पर पौने दो बजे तक शिवराजसिंह चौहान के साथ चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर और प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे बैठकर एक-एक बागी को मनाते रहे। इसका परिणाम यह रहा है कि ज्यादातर बागी हुए भाजपा नेताओं ने अपने को पीछे कर लिया। वास्तव में भाजपा संगठन का यह कार्य चुनावी राजनीति में एक बड़ी जीत के रूप में जरूर देखा जा सकता है।
संबल-भावांतर जैसी योजनाएं लुभा रहीं जनता को
वैसे तो मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों के शासन के दौरान भाजपा ने जितनी योजनाएं जनता के हित में बनाई हैं, शायद ही उसकी आधी देश के किसी राज्य ने बनाई हों, किेंतु इस विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गरीबों के बिजली बिल माफ करनेवाली ‘’संबल योजना’’ ने जैसे तमाम गरीबों के दिल जीतने का काम किया है। शिवराज जब संबल योजना को लेकर चुनावी सभाओं में बोलते हैं तो जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। किसानों को मुख्यमंत्री जहां भी जा रहे हैं यही आश्वस्त कर रहे हैं कि आप लोग इस बात के लिए तैयार रहो कि आप लोगों के खातों में इतना पैसा आने वाला है कि पता लगाने के लिए बैंक जाना पड़ेगा कि कौन सी फसल का कितना पैसा आ गया। भाजपा सरकार की ‘’भावांतर योजना’’ किसानों के लिए किसी बड़ी उपलब्धी से कम नहीं रही है । इसी प्रकार से युवाओं के बीच युवा योजनाओं की तो महिलाओं के बीच महिलाओं के लिए किए गए कार्य तथा अल्पसंख्यकों के बीच अल्पसंख्यक हित योजनाओं के बारे में विस्तार से बताना शिवराज बिल्कुल भी नहीं भूल रहे । वे हर जगह ‘’समृद्ध मध्यप्रदेश’’ के लिए वोट मांगते नजर आ रहे हैं और फिर एक बार सरकार बनाने का मौका भाजपा को दें अपील कर रहे हैं।
काम कर गया आइडिया
मध्यप्रदेश में भाजपा ने फिर अपनी सरकार बनाने के लिए यहां नया अभियान छेड़ा हुआ है। भाजपा कह रही है कि यदि प्रदेश में सरकार भाजपा की बनती है तो प्रदेश के विकास में जनता के आइडिया को महत्व दिया जाएगा। बीजेपी ने प्रदेश की जनता को नारा दिया है-'आइडिया में है दम, पूरा करेंगे हम।' इस अभियान से भाजपा के पास समृद्ध मप्र से जुड़े करीब 23 लाख सुझाव अब तक आए हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का साफ कहना है कि प्रदेश की समृद्धि का रोड मैप मैं अकेला नहीं बनाऊंगा पहले की तरह से भाजपा की सरकार आने पर इस बार भी भूमिका जनता की ही महत्वपूर्ण रहेगी। प्रदेश के साढ़े सात करोड़ लोग मिलकर ये रोड मैप तैयार करेंगे और प्रदेश को समृद्ध बनाएंगे। कांग्रेस सरकार से मिले बीमारू मध्यप्रदेश को हमने पहले सुचारू बनाया, फिर विकसित किया। आप सुझाव दें, हम 5 सालों में प्रदेश को समृद्ध बनाएंगे । शिवराज आज यह भी कहते हैं, हमारी सरकार ने जो भी योजनाएं लागू की हैं, वे जनता से मिले सुझावों के आधार पर ही है। लाड़ली लक्ष्मी से लेकर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना तक और तीर्थ दर्शन योजना से लेकर संबल तक, सभी योजनाओं की जड़ में लोगों से मिले सुझाव ही हैं। इसके लिए हमने समाज के हर वर्ग की महापंचायतें और सम्मेलन किए और उनकी राय जानी। उसी के आधार पर योजनाएं बनाईं।
वस्तुत: मुख्यमंत्री की कही बातें जनता को रास आ रही हैं और यही कारण है कि मतदान तारीख नजदीक आने के साथ ही प्रदेश में फिर एक बार शिवराज लहर तेज होती दिखाई दे रही है और प्रदेश में चारो ओर यही नारा बुलंद होता जा रहा है ‘’फिर भाजपा फिर शिवराज’’ ।