13 नवंबर को कश्मीर एकजुटता दिवस मनाने तथा एन आर सी का विरोध करने का निर्णय
बांग्लादेश भारत पाकिस्तान पीपुल्स फोरम का सातवां त्रिदेशीय सम्मेलन सम्पन्न
देश भर में मनाई जाएगी शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी
खबर नेशन /Khabar Nation
बांग्लादेश भारत पाकिस्तान पीपुल्स फोरम का सातवां त्रिदेशीय सम्मेलन कमेटी के अध्यक्ष पूर्व सांसद ,देवव्रत विश्वास की अध्यक्षता में तथा कमेटी के महासचिव बांग्लादेश के सांसद मोयुद्दीन बादल की उपस्थिति में नलिनी गुहा हॉल ,कोलकाता में संपन्न हुआ।
सम्मेलन में 120 प्रतिनिधियों ने भाग लिया । वीजा न मिलने के कारण पाकिस्तान के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके लेकिन फोन पर उन्होंने अपना संदेश प्रतिनिधियों को दिया। सम्मेलन ने अध्यक्ष देवब्रत विस्वास के प्रस्ताव पर बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जनशताब्दी वर्ष को धूमधाम से मनाने का फैसला किया। इसकी शुरुवात 18 फरबरी 2020 को नेताजी के कोलकता में एल्विन रोड स्थित निवास से होगी ,यात्रा बंगबंधु के निवास धानमंडी ( ढाका ) तक जाएगी।
सम्मेलन में जम्मू कश्मीर के पूर्व सांसद शेख अब्दुल रहमान द्वारा जम्मू कश्मीर को लेकर प्रस्ताव पेश किया,जिसका समर्थन डॉ सुनीलम ने किया। सम्मेलन में जस्टिस फॉर कश्मीर अभियान चलाने का निर्णय लिया । इस अभियान के तहत 13 नवंबर को ,जब धारा 370 हटाने 35ए हटाने का 5 अगस्त 2019 को जल्दबाजी में निर्णय लिया गया ,जम्मू कश्मीर की जनता से बिना सलाह मशवरे के जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा समाप्त कर राज्य को दो केंद्र शासित छेत्रों में विभक्त करने का असंवैधानिक एवम तानाशाही पूर्ण फैसला लिया गया था, इस फैसले के 100 दिन पूरा होने के अवसर पर कश्मीर एकजुटता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया ।
यह फैसला 76 दिन पूरे होने के अवसर पर इसलिए लिया गया ताकि जम्मू कश्मीर की जनता को यह बतलाया जा सके कि ढाई महीने से उन्हें जेल में कैद रखे जाने का देश की जागरुख एवम लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोग जनता केंद्र सरकार के खिलाफ है तथा जम्मू कश्मीर की जनता के साथ है ।
पश्चिम बंगाल के पूर्व विधायक हरिपद विश्वास द्वारा नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस( एन . आर . सी ) के विरोध में प्रस्ताव प्रस्तुत किया ,जिसका समर्थन त्रिपुरा के सुभाष रॉय ने किया, निर्णय लिया गया कि बी बीबीपी एफ का एक प्रतिनिधिमंडल जाकर निर्माणाधीन डिटेंशन कैंप का दौरा करेगा तथा बी बी पी पी एफ द्वारा रिजेक्ट एनआरसी अभियान चलाया जाएगा। सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि बी बी पी पी एफ हर स्तर पर धर्म के आधार पर नागरिकता तय करने वाले नागरिकता कानून का विरोध करेगी।
बांग्लादेश के बासु रंजन चक्रवर्ती ने तीनों देशों में बढ़ते भष्ट्राचार पर चिंता व्यक्त करते हुए ,भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाने का सुझाव दिया। उन्होंने बांग्लादेश में 27 जनवरी 1922 को अंग्रेजी हुकूमत द्वारा किये गए नरसंहार को किसान विद्रोह दिवस - राज्य दमन विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का प्रस्ताव दिया जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
सिराजुल इस्लाम रोनी ने रोहिंग्या से जुड़ा मुद्दा उठाया ,अन्य वक्ताओं ने रोहिंग्यास समस्या के समाधान के लिए सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की मांग की। इस मुद्दे को देश और दुनिया के सामने लाने के लिए 20 फरवरी को रोहिंग्या दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।. कोलकाता के शिक्षाविद अमिताभ दत्ता द्वारा तीनों देशों के छात्र- छात्राओं के बीच में बीबीपीपी एफ की ओर से एक्सचेंज प्रोग्गराम चलाने का सुझाव दिया गया,जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर उन्हें तीनो देशों के बीच में छात्र-छात्राओं के आवागमन को बढ़ावा तथा एक्सचेंज कार्यक्रम चलाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई।
बांग्लादेश के अख्तर उज्मान द्वारा एक्स्ट्रा ज्यूडिशल किलिंग्स का मामला उठाया गया ,जिसे सदन ने गंभीरता से लेते हुए तीनो सरकारों से तत्काल एक्स्ट्रा ज्यूडिशल कलिंग पर रोक लगाने के मांग करते हुए ऐसी हत्याओं के दोषी अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाने का नीतिगत फैसला लेने की मांग की।
दिल्ली से आए पत्रकार अभिषेक रंजन सिंह ने भारत और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के 5 वर्ष जो जाने के बावजूद कूचबिहार जिले के मेखलीगंज, हल्दीबाड़ी और दिनहटा में बनाए गए अस्थाई शिविरों में रह रहे एक हजार से अधिक बांग्लादेशियों का संपूर्ण पुनर्वास करने की अपील भारत सरकार से की गई। सरकार से तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग के साथ प्रस्ताव पारित किया गया। कोलकता की गोपा मुखर्जी द्वारा तीनों देशों में महिलाओं की ट्रेफिकिंग का मुद्दा उठाया जिस पर यह तय हुआ कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर बीबीपीपी एफ के द्वारा इस मुद्दे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि 20 फरवरी के पहले तीनों देशों में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे ।19,20,21 फरवरी को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भाषा दिवस के अवसर पर विभिन्न मुद्दों पर कार्यक्रम आयोजित करने तथा त्रिदेशीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।
त्रिदेशीय कमेटी के अध्यक्ष देवव्रत विश्वास द्वारा तीनों देशों के बीच में विभिन्न नदियों को लेकर चल रहे विवादो पर चिंता व्यक्त की गई तथा यह तय किया गया कि तीनो देशों के नदियों के विशेषज्ञों का कमीशन गठित कर विवाद के निपटारे हेतु सरकारों को ठोस सुझाव दिए जाएंगे ।
सम्मेलन में मोयुद्दीन बादल के नेतृत्व में श्रीनगर में प्रतिनिधिमंडल भेजने तथा डॉ सुनीलम के नेतृत्व में बर्राक वैली में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय भी लिया गया।
सम्मेलन में सोशल मीडिया टीम भी गठित की गई।
सम्मेलन में नई त्रिदेशीय कमेटी का चयन किया गया जिसमें श्री देवव्रत विश्वास को अध्यक्ष अध्यक्ष मोयउद्दीन बादल जी को महासचिव , गोपा मुखर्जी को उप महासचिव बनाया गया ।भारत और बांग्लादेश के बी बी पीपीएफ से जुड़े नेताओं को उपाध्यक्ष एवं सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। उपाध्यक्ष रू भानु रंजन चक्रवर्ती ,मिंटू ,बाबू ,नानु ( सभी बांग्लादेश से ) ,शेख अब्दुल रहमान ( पूर्व सांसद ,जम्मूकश्मीर) ,प्रवास रॉय ,गोविंद रॉय ,सुभाष रॉय ,नरेन चटर्जी ,सत्यब्रत चैधरी ,सुखनंदन सिंह अलुवालिया ,अभिषेक रंजन रॉय (सभी पश्चिम बंगाल से ) सचिव सिराजुल इस्लाम रोनी ,शंकर तालुकदार ( बंग्लादेश) हरिपद विश्वास ,जीवन साहा ( पश्चिम बंगाल ) ,डॉ सुरेश खैरनार( नागपुर )श्यामल रॉय (त्रिपुरा ),मिहिर नंदी ( असम ) ज्ञानेश्वर सिंह ( मणिपुर ) ,अरुण श्रीवास्तव ( दिल्ली ) गुरमीत सिंह ,लीलाधन शर्मा ( पंजाब ) ,प्रफुल सामंत रे ( ओडिसा ) ,अमृत वर्षा ( जम्मू कश्मीर ).।त्रिदेशीय सांस्कृतिक समिति का संयोजक रीटा चक्रवर्ती को बनाया गया।
पाकिस्तान कमिटी से नाम प्राप्त होने के बाद उन्हें भी त्रिदेशीय समिति में शामिल करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन के दोनों दिवसीय कार्यवाही का संचालन गोपा मुखर्जी ने किया। सम्मेलन ने गंभीर बीमारी के बावजूद बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए मानिक समझदार जी का विशेष आभार प्रदर्शन किया तथा उन्हें त्रिदेशीय कमेटी का राजनीतिक सचिव चुना किया गया।