मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री मनोहर ममतानी ने ’नौ मामलों में स्वतः संज्ञान’ लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है।
‘नौ मामलों में स्वतः संज्ञान’
एके-47 जैसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी झाडू-पोंछा जैसे घरेलू काम में लगी ड्यूटी
खबर नेशन / Khabar Nation
भोपाल, । भोपाल शहर की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीडिया रिपोट में छपी तस्वीरों में कुत्ते को नहलाते और साफ-सफाई कर रहे युवक स्पेशल आम्र्ड फोर्स (एसएएफ) के जवान हैं। तस्वीरें भोपाल के चार इमली स्थित आईपीएस अफसरों के घरों की हैं। यहां एसएएफ के जवान हर रोज इसी तरह के घरेलू काम करते दिखते हैं। ऐसे 120 प्रधान आरक्षक और 4,447 आरक्षक आईपीएस अफसरों के घर में अर्दली के तौर पर तैनात हैं। इन जवानों ने सशस्त्र बल की पूरी ट्रेनिंग ली है। एके-47 जैसे हथियार चलाने में माहिर इन जवानों ने डाकुओं के सफाये में भी अहम भूमिका निभाई। लेकिन, अब इनसे कुत्ते घुमाने, गार्डन और किचन संभालने जैसे काम कराए जा रहे हैं। आरक्षकों को 30 हजार और प्रधान आरक्षक को 60 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। इस हिसाब से सरकार इन जवानों के वेतन पर हर साल करीब 176 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिदेशक, पुलिस मुख्याल भोपाल, एवं एडीजी, एसएएफ, भोपाल से जांच कराकर विशेष सशस्त्र बल के प्रधान आरक्षकों/आरक्षकों की कथित नियम विरूद्ध पदस्थापना, उनकी गरिमा के विपरीत घरेलू कार्य कराते हुए की जा रही प्रताड़ना को रोके जाने के लिए की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह में मांगा है। तथा यह भी स्पष्टतया प्रतिवेदित करें कि - 1. ऐसे कितने प्रधान आरक्षक/आरक्षक हैं ? 2. उन्हें किस-किस अधिकारी के पास पदस्थ किया गया है ? 3. उन्हें ऐसे पदस्थ करने का आदेश किस अधिकारी ने दिया है ? 4. क्या ऐसी पदस्थापना नियमानुसार होकर वैधानिक है ? 5. यदि नहीं, तो इसके लिये उत्तरदायी पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई है ? या प्रस्तावित है ? 6. यदि ऐसी पदस्थापना नियम विरूद्ध है तो ऐसे पुलिस बल को यथाशीघ्र प्रत्याहत कर उचित स्थान पर पदस्थापना करने की क्या कार्यवाही की गई है ?
ऐसे कैसे दूर होगा कुपोषणय आंगनबाड़ी भवन का परिसर बदहाल,दरवाजे टूटे, टाइल्स उखड़ी, सामने कचरे का ढेर
भोपाल शहर के जिन आंगनबाड़ी भवनों से प्रदेश की आधा दर्जन से ज्यादा योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाने और कुपोषण दूर करने पोषण आहार जैसी योजनाएं संचालित होती हैं, वे ही बदहाली से घिरी हैं। इनके आसपास सीवेज बह रहा है और गंदगी से घिरी हुई हैं। डीबी स्टार ने गुरुवार को राजधानी के कुछ आंगनबाड़ी भवनों का निरीक्षण किया तो कहीं कचरे का ढेर लगा मिला तो कहीं मेन गेट ही गायब था। आसपास पूछने पर पता चला कि लोहे के गेट और भवन लगे लकड़ी के दरवाजे असामाजिक तत्व तोड़कर ले गए। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भवन के सामने ही कचराघर है और आसपास गंदगी। महिला एवं बाल विकास द्वारा आंगनबाड़ी भवनों में लगातार बेहतर व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन शहर में कई भवन बदहाली से ही घिरे हैं। उन्हें व्यवस्थित नहीं किया जा रहा है। भवनों के आसपास रहने वाले लोग भी बदबू से परेशान हैं। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने आयुक्त, नगर निगम, भोपाल तथा संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग, संचालनालय, भोपाल से जांच कराकर उक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों के आसपास की सफाई व्यवस्था एवं आंगनबाड़ी केन्दों के भवनों की व्यवस्था के संबंध में की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है।
मरीज खींचते हैं स्ट्रेचर, भर्ती होने घंटों इंतजार
भोपाल शहर के हमीदिया अस्पताल में बीते शनिवार सुबह के 10.35 बजे एक मरीज को उनके एक स्वजन लेकर आते हैं। स्वजनों में से दो लोग सुरक्षा कर्मी से बातचीत करते हैं और ट्रामा ओपीडी जाने का रास्ता पूछते हैं। स्वजन के साथ तेज दर्द के साथ पहुंचा युवक ओपीडी पहुंच जाता है। यहां पर मरीजों की भीड़ से डाक्टर तक पहुंचने में उसको एक घंटा लग जाता है। सागर जिले जगदीश लोधी अपनी मां जयकुमारी को सागर जिला अस्पताल से रेफर करा कर लाए हैं, लेकिन उसे अस्पताल में भर्ती किया ही नहीं गया। दोपहर 12 बजे उससे कहा गया कि पुराने भवन की ओपीडी में दिखाओ। तभी बच्ची को लेकर आए लोग स्ट्रेचर खुद घसीट रहे थे। इस तरह के नजारे यहां रोज देखने को मिलते हैं जो अस्पताल प्रबंधन के उस वादे पर तमाचा है जो सुविधाएं देने के हैं। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, संचालनालय, भोपाल से जांच कराकर की गई कार्यवाही के संबंध में तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।
बेसहारा विधवा को किया मृत घोषित
रायसेन जिले के ग्राम पंचायत बड़गवां में एक मामला देखने को मिला, जब गांव में मुख्यमंत्री जनसेवा शिविर लगा तो इसमें एक ौंकाने वाला मामला सामने आया, जब एक विधवा महिला ने आकर बताया कि मर गए हैं हम। मुख्यमंत्री जनसेवा शिविर के दौरान लड़खड़ाते बमुश्किल पहुंची शांति बाई ने शिकायत करते हुए बताया कि वह असहाय एवं विधवा है, उसका पालन पोषण करने वाला कोई नहीं है। उसके पति की मृत्यु के बाद उसको लगातार दो साल तक निराश्रित विधवा पेंशन मिली, लेकिन पूर्व सरपंच बाबू सिंह लोधी एवं उसके पुत्र रोजगार सहायक शिवराज सिंह लोधी ने उसे मृत बताकर पेंशन बंद करवा दी है। उसने सभी से फरियाद की, लेकिन किसी ध्यान नहीं दिया। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर, रायसेन से जांच कराकर विधवा वृद्ध महिला शांतिबाई की पेंशन आदि के लाभ प्राप्ति को सुनिश्चित कर ऐसे मामले में दोषी व्यक्ति/अधिकारी के विरूद्ध की गई कार्यवाही के संबंध में तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।
जमीन में दबा मिला एक लापता व्यक्ति का शव, कुत्तों ने नोचा
सागर जिले के मालथौन थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेमरालोधी के पास एक खेत में शुक्रवार देर रात जमीन में दबा एक व्यक्ति का शव मिलने से गांव में सनसनी फैल गई। मृतक का पैर जमीन से बाहर निकला हुआ था। जिसे गांव के आवारा कुत्ते नोच रहे थे और बहुत दुर्गंध आ रही थी। जब गांव के लोग पहुंचे तो शव तीन दिन से लापता 52 वर्षीय व्यक्ति का निकला। पुलिस ने शव को मर्चुरी में रखवाया और जांच पड़ताल शुरू की। मृतक के भतीजे अवतार सिंह ने बताया कि उसके चाचा मलखान सिंह उम्र 52 वर्ष निवासी पीपर खिरिया जो अपने गांव से आधा किलोमीटर दूर सेमरा लोधी गांव के बाहर अपने खेत में बने कच्चे घर में रहते थे। उन्होंने बताया कि 16 मई की रात 9 बजे से वह लापता हुए थे। जिसकी जानकारी पुलिस थाने में भी दी गई थी। इसके बाद बीती रात जब सेमरालोधी गांव के लोगों ने बताया कि खेत में से बहुत ज्यादा दुर्गंध आ रही है और आवारा कुत्ते भी मौजूद हैं, जब सभी लोगों ने मौके पर जाकर देखा तो शव का एक पैर जमीन में से निकला हुआ था। जमीन में से शव को बाहर निकला गया तो वह तीन दिन से लापता चाचा का शव था। चाचा की हत्या कर उनका शव जमीन में गाड़ दिया गया। चाचा जहां रहते थे वहां से करीब 200 मीटर की दूरी पर शव मिला है। इसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई। इसके बाद रात में ही शव को मर्चुरी में रखवा दिया गया था। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने एसपी, सागर से जांच कराकर की गई कार्यवाही के संबंध में तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।
गर्मी से तड़पकर अस्पताल परिसर में वृद्ध ने तोड़ा दम
धार जिले के कुक्षी सरकारी अस्पताल में अत्याधिक गर्मी के कारण एक वृद्ध की मृत्यु हो जाने के मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर, धार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, धार से जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है।
दबंगों ने बनया हवस का शिकार
मुरैना जिले के चिनौनी थानाक्षेत्र अंतर्गत तिंदोखर रोड के पास दबंग जाति के लगभग आधा दर्जन लोगों ने मल्लाह जाति के परिवार के घर पहुंचकर हथियारों से लैस होकर पति को बांधकर उसकी पत्नी से सामूहिक दुष्कर्म किया एवं उसका वीडियो भी बना लिया। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक, चंबल संभाग एवं पुलिस अधीक्षक, मुरैना से जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन आवश्यक दस्तावेजों सहित तीन सप्ताह में मांगा है।
सर्पदंश की शिकार महिला की झाड़-फूंक में गई जान
गुना जिले के धरनावदा थानांतर्गत ग्राम पुरैना में सर्पदंश की हुई शिकार महिला की झाड़-फूंक के चक्कर में जान चली गई। समय रहते अस्पताल पहुंचने पर संभवतः उसकी जान बच सकती थी। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर, गुना से जांच कराकर मृतिका के परिजन को शासन के नियमानुसार देय आर्थिक मुआवजा राशि के संबंध में प्रतिवेदन एक माह में मांगा है।
चलती बस का फर्श टूटा, पहिए से कुचलकर मासूम की मौत
दमोह जिले में एक बस क्रमांक एमपी 12 पी 0270 के फर्श टूट जाने से पहिए से कुचलकर मासूम की मौत होने के मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर, छतरपुर से जांच कराकर बस क्रमांक एमपी 12 पी 0270 के दुर्घटना के पूर्व जारी किये गये फिटनेस से संबंधित आरटीओ, छतरपुर कार्यालय के अभिलेख की प्रतियों सहित दुर्घटना उपरांत बस की स्थिति की जांच कराकर बस के फर्श के संबंध में तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।
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गौरव चतुर्वेदी
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