प्रदेश में जल संरक्षण का अभियान बना जन-आंदोलन
भोपाल। जल संकट के समाधान के लिए प्रदेश में जल स्त्रोतों के पुनरूद्धार का अभियान चलाया जा रहा हैं। शहडोल जिले में जल संरक्षण का अभियान जनांदोलन बन चुका हैं। जिले के बुढ़ार विकासखण्ड की कसेढ़ और उसकी सहायक नदियों और नालों का सफाई अभियान जन-सहयोग से चलाया जा रहा हैं। बुढ़ार के छिरहा तालाब में भी जन-सहयोग से सफाई अभियान चलाया जा रहा हैं।
शहडोल में पाण्डवनगर और पॉलीटेक्निक के पास स्थित तालाब में प्रति-दिन ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा के लिए सैकड़ों लोग घण्टों पसीना बहा रहे हैं। जल संरक्षण के इस कार्य में जन-प्रतिनिधि, शासकीय सेवक, प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी तथा आम आदमी की बराबर की भूमिका हैं। जल संरक्षण का सामाजिक सहभगिता से शुरू किया गया यह अभियान जन-आंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा हैं।
शाजापुर जिले में जन-अभियान परिषद द्वारा पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाया जा रहा हैं। जिले के ग्राम रंथभंवर की पुरानी बावड़िया और कुण्डियां को शाजापुर के बीएसडब्ल्यू के छात्र पुनर्जीवित करने में जुट गए हैं। गाँव के अन्य युवा भी इस काम में उन्हे सहयोग कर रहे हैं। बीएसडब्ल्यू के छात्रों और अन्य युवाओं ने मिलकर रणनीति तैयार की। सबसे पहले युवाओं ने प्राचीन ओंकारेश्वर मंदीर की बावड़ी की सफाई करने का निश्चय किया। बावड़ी में ग्रामीण कई सालों से कचरा डालते थे, जिससे बावड़ी भर गई थी। युवा वर्ग गैती, फावडे और तगाड़ी लेकर मानव श्रृंख्ला बनाकर सफाई के काम में जुट गए। युवाओं को काम करता देख गाँव के अन्य लोग भी सहयोग करने के लिए प्रेरित हुए। सबके सहयोग से बावड़ी से मलबा निकाला गया। मलबे को ग्रामीणों ने अपने खेतों में खाद के रूप में उपयोग किया।
पहले इस बावड़ी का पानी सडा हुआ बदबूदार था, जो किसी काम में नहीं आता था। बावड़ी में अब प्राकृतिक जल स्त्रोत से पानी आने लगा हैं। इसका उपयोग पशुओं के लिये पेयजल के रूप में होने लगा हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षा उपरांत इस पानी का उपयोग पेयजल के लिये भी हो सकेगा।
(खबरनेशन / Khabarnation)