जिन मुद्दों पर हंगामा उन पर चर्चा करने का साहस करें विपक्ष
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व सांसद आलोक संजर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की विडंबना हैं कि कांग्रेस सहित विपक्षी दल पिछले 20 दिनों तक जिन मुद्दों को लेकर संसद को अखाडा बनाते रहे हैं। उन पर न तो चर्चा करने का साहस दिखा सके और न उन्होंने संसद चलने दी। इससे संसद की गरिमा का क्षरण हुआ हैं। देश की जनता यह जानती हैं कि कांग्रेस ने देश की ज्वलंत समस्याओं से मुहं मोड़कर सर्वोच्च पंचायत को हंगामे का केन्द्र बनाने पर आमादा हैं।
उन्होंने कहा कि संसद का एक एक मिनट बहुमूल्य होता हैं। जनता की खून पसीने से अर्जित आय के योगदान से संसद का संचालन होता हैं। पिछले 23 दिन बजट सत्र का दूसरा चरण बिना कामकाज के बर्बाद हुआ हैं। जबकि सत्र की गणना उत्पादक अनुष्ठान के रूप में होती हैं। नीति और न्याय का तकाजा हैं कि बिना कामकाज के लोकधन से मानदेय लेना अनैतिक होगा। संजर ने कहा कि एनडीए के सांसदों ने स्वयं स्फूर्त निर्णय लिया हैं कि वे बिना कामकाज हुए दूसरे चरण के 23 दिनों का मानदेय नहीं लगे। जब श्रम सीकरों से देश का निर्माण करने वालों के लिए नो वर्क नो पे के सिद्धांत की गला फाड़कर वकालत की जाती हैं तो हंगामा में डूबे सत्र का मानदेय लेना कौन सी नैतिकता होगी। काम काज न हो पाने को विपक्ष और कांग्रेस यदि अपनी सफलता मानकर चलती हैं तो फिर लोकतंत्र और संसदीय प्रणाली पर ही इन्होंने सवालिया विराम लगा दिया हैं। आत्म सम्मान और अंतःकरण गंवारा नहीं करता कि बिना कामकाज के मानदेय लिया जाए। (खबरनेशन / Khabarnation)