कौशल्या ने पिता को किया कर्जमुक्त
भोपाल। सागर जिले के केसली ब्लॉक के ग्राम जेतपुर डोमा निवासी थम्मन सिंह को अपनी बेटी पर नाज़ हैं। उनका कहना हैं कि उनकी बेटी कौशल्या आज ना सिर्फ बेटों जैसा कमाकर अपने पिता के कंधे से कंधा मिलाकर घर चलाने में मदद कर रही हैं, बल्कि उसकी मेहनत ने मुझे कर्ज से मुक्त कर दिया हैं।
कौशल्या ने 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की हैं। उसने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना के अंतर्गत हॉस्पेटिलिटी ट्रेड में तीन माह का प्रशिक्षण लिया। इस आवासी प्रशिक्षण में उसे कस्टमर-डीलिंग, हाउस-कीपिंग, रिसेप्शन, औपचारिक अंग्रेजी बोलचाल,, काउंसिलिंग, कम्प्यूटर परिचालन विषयों पर प्रेक्टिकल एवं थ्योरी ज्ञान दिया गया। ये प्रशिक्षण विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से आजीविका मिशन आयोजित करता हैं। प्रशिक्षण के बाद कौशल्या को अहमदाबाद (गुजरात) की कम्पनी में नौकरी मिली। इस कम्पनी में उसे कार्य के दौरान चाय-नाश्ता, भोजन एवं कम्पनी द्वारा ही संचालित हॉस्टल में आवास एवं रात्रि भोजन की सुविधा उपलब्ध होती थी। कौशल्या के पिता थम्मन सिंह ने अपने पारिवारिक विवाद के निपटान के लिये व्यापारी से ब्याज पर कर्ज उठाया था, जिसको चुकाना उन्हें भारी पड़ रहा था।
बेटी अपने पिता के दर्द से भली-भाँति परिचित थी। उसने फरवरी, 2017 में अपनी पहली तनख्वाह में से पाँच हजार रुपये पिता को भेजे। माह फरवरी के वेतन में उसके सामने दो विकल्प थे या तो वो होली मनाने अपने घर जाये, लेकिन आने-जाने, कपड़ा, मिठाई में 2 से 3 हजार रुपये खर्च होने की आशंका थी। दूसरा था वेतन से 5 हजार और होली में ओवर टाइम ड्यूटी करके कमाये अतिरिक्त दो हजार कुल मिलाकर 7 हजार रुपये पिता को भेजे और उन्हें साहूकार के चंगुल से मुक्त करे।
बेटी ने दूसरे विकल्प को चुनते हुए अपने पिता को कर्जमुक्त कर दिया। थम्मन सिंह का कहना हैं कि मेरे दो बेटे, तीन बेटियाँ हैं। कौशल्या इन सब में सबसे छोटी हैं जो छोटी ने कर दिखाया, बड़े नहीं कर पाये। डबडबाती आँखों से उन्होंने कहा कि मेरी बेटी बेटों से कम नहीं हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)