फ्लेसिड और मोटर डिले बिमारी से ग्रसित मासूम ऋषभ को मिला नि:शुल्क उपचार
भोपाल। मासूम ऋषभ पिता सुखदेव महोबे जन्म से ही फ्लेसिड एवं मोटर डिले से ग्रसित था। जन्म के समय जब वो रोया नहीं तो मां ज्योति और परिजन घबरा गए। ज्योति के पति सुखदेव महोबे ड्रायवर हैं। सुखदेव की आमदनी भी ज्यादा नहीं हैं। कहीं बाहर उपचार कराना इनके लिये संभव नहीं था। ऋषभ की स्थिति को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र चिकित्सकों ने बताया कि ऋषभ फ्लेसिड (अंगो का लुंजपुंजपन) एवं शरीर के विकास की धीमी गति (मोटर डिले) बीमारी से ग्रसित हैं।
ऋषभ को 15 दिन एस.एन.सी.यू. (गहन शिशु चिकित्सा इकाई) में भर्ती किया गया। ऋषभ ने रोना तो शुरू किया किन्तु उसे बहुत ज्यादा झटके आने लगे। तत्कालीन जिला टीकाकरण अधिकारी एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा ऋषभ पर विशेष ध्यान देकर उपचार किया गया। चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि इस प्रकार की बीमारी में बच्चा धीरे-धीरे सीखेगा उसकी प्रगति देर से होगी।
इस बीच मई 2016 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमला में आर.बी.एस.के. (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) का शिविर हुआ। ऋषभ को लेकर माता-पिता पहुंचे। चिकित्सकों ने डी.ई.आई.सी. सेंटर (जिला शीध्र हस्ताक्षेप केन्द्र) बैतूल ले जाने की सलाह दी एवं संपूर्ण जानकारी से अवगत कराया। ज्योति ऋषभ को लेकर उपचार हेतु जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में आने लगी। यहां ज्योति को डी.ई.आई.सी. ने धीरज रखकर रोज आने के लिये परामर्श दिया। अब ज्योति को ऋषभ में थोड़ा सुधार परिलक्षित हुआ तो वह रोज आने लगी।
ज्योति के चेहरे पर असीम मुस्कान और संतोष के भाव हैं। वह कहती हैं कि जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में कार्यरत स्टाफ का व्यवहार बहुत सहयोगात्मक हैं। ऋषभ को मिली नि:शुल्क सहायता और सेवा से ज्योति बहुत प्रसन्न हैं। अब ऋषभ गर्दन सम्भाल लेता हैं, बैठ जाता हैं, खड़ा भी हो जाता हैं और मम्मी-पापा, अम भी बोल लेता हैं। अब मां को विश्वास हैं कि ऋषभ भी सामान्य बच्चे की तरह एक दिन स्कूल जायेगा। उनके सूने जीवन में उजियारा करेगा। (खबरनेशन / Khabarnation)