झाबुआ की वीणा और देवास की सबूबाई बनी लखपति

भोपाल। आजीविका मिशन ने 'जहाँ चाह-वहाँ राह' की कहावत को चरितार्थ किया हैं। मिशन की सहायता से खातेगाँव की सबूबाई और झाबुआ की 'वीणा' गरीबी से मुक्त हो गई हैं, अपने-अपने परिवार की आर्थिक ताकत बन गई हैं।

चूड़ियों ने वीणा को बनाया लखपति : झाबुआ जिले के ग्राम गोपालपुर की वीणा म.प्र. ग्रामीण आजीविका मिशन में आशा स्व-सहायता समूह से जुड़कर लखपति बन गई हैं। आज वह स्वयं के सिलाई और चूड़ी के काम तथा किराना दुकान से डेढ़ से दो लाख रूपये सालाना कमा रही हैं।

आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले वीणा की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। थोड़ी-सी जमीन पर खेती से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई के कारण साहूकारों का कर्ज का बोझ भी वीणा पर आ गया था। वीणा ने समूह से ऋण लेकर सिलाई का काम शुरू किया, पति को किराने की दुकान खुलवाई। वीणा ने समूह से 5 बार में 90 हजार ऋण लिया। उसने चूड़ी बनाने का काम भी शुरू किया। अब वीणा और उसका पति साल भर में 2 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं। खुशहाली के साथ साहूकार के कर्ज से भी मुक्त हो गये हैं।

डेरी संचालन से सबूबाई बनी लखपति : देवास जिले में खातेगांव विकासखण्ड के ग्राम कुंडगांवखुर्द की सबूबाई ने आजीविका मिशन से अपने परिवार को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना दिया हैं। मजदूरी से घर चलाने वाली सबूबाई अब डेरी संचालक बन गई हैं और सालना लगभग डेढ़ लाख रूपये कमा रही हैं।

स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले सबूबाई और उसका परिवार मजदूरी करता था। जब से इसने आजीविका मिशन से जुड़कर डेरी का व्यवसाय शुरू किया हैं, तब से सालाना डेढ़ लाख रुपये कमा रही हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)
 

Share:


Related Articles


Leave a Comment