सरकार के कुप्रबंधन के कारण जनता अंधकार में रहने को मजबूर: सरदेन्दू तिवारी
खबर नेशन/Khabar Nation
भोपाल। बिजली के सरप्लस राज्य मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के कुप्रबंधन के कारण जनता अंधकार में रहने को मजबूर है। जबकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बिजली का भरपूर उत्पादन कर प्रदेश को सरप्लस राज्य बनाया था। प्रदेश सरकार के कुनीतियों का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ने लगा है। अमरकंटक और बिरसिंहपुर सहित कई संयत्रों पर कोयले का प्रबंधन नही कर पाने के कारण बिजली उत्पादन में कमी आई है। जनता को अघोषित बिजली कटौती का दंश झेलना पड़ रहा है। यह बात प्रदेश मंत्री व विधायक सरदेन्दू तिवारी ने अमरकंटक (चचाई) संयंत्र में कोयला खत्म हो जाने से बिजली संकट बढ़ने के प्रकोशित समाचार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार के आते ही सरप्लस बिजली वाला राज्य अघोषित विद्युत कटौती को झेल रहा है। जनता परेशान है और ऐसे समय में सरकार को अच्छा प्रबंधन करने की आवश्यकता है, लेकिन बिजली का संकट को लेकर कमलनाथ सरकार कितनी गंभीर है, यह इस बात से पता चलता है कि प्रदेश के अमरकंटक के चचाई सयंत्र में कोयला खत्म हो गया है। वहीं संजय गांधी ताप विद्युत सयंत्र बिरसिंहपुर, सारणी और सिंगाजी में भी कोयले की कमी आ गयी है। विभिन्न बिजली सयंत्रों को फुल लोड पर चलाने के लिए कोयले का संकट उत्पन्न हो गया है। यह सरकार के कुप्रबंधन को ही दर्शाता है। उन्होंने इस समस्या से सरकार के विद्युत संयंत्रों को कोयला उपलब्ध नहीं करवा पा रही जिसके कारण इन संयंत्रों से कोयले की कमी के कारण 5400 मेगावाट की जगह मात्र 2330 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन हो रहा है।
तिवारी ने कहा कि कमलनाथ सरकार को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। सरकार तबादलों में व्यस्त है और तबादलों की इस भूख ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को तहस-नहस कर दिया है। और तो और यह सरकार बिजली, पानी, सड़क जैसी व्यवस्थाओं में भी सुधार नहीं कर पा रही है। कमलनाथ सरकार एक ओर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली को लेकर प्रबंधन भी सही तरीके से नहीं कर पा रही है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ बिजली के मामले में भी मध्यप्रदेश को बंटाढार की ओर ले जा रहे हैं।