‘पर्याप्त पानी’-‘पहुँच में पानी’ और ‘पीने योग्य पानी’ का कानूनी अधिकार-‘राइट टू वाटर’

राजनीति Jun 23, 2019

खबर नेशन/Khabar Nation  

भोपाल, राजा भागीरथ के प्रयासों से माँ गंगा का अवतरण स्वर्ग से पृथ्वी पर संभव हो पाया था, और आज कमलनाथ जी के भागीरथी प्रयासों का ही प्रतिफल है कि हम ‘पर्याप्त पानी’-‘पहुँच में पानी’ और ‘पीने योग्य पानी’ का कानूनी अधिकार मध्यप्रदेश के नागरिकों के लिए लाने की दिशा में पहला कदम बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा जो अपने नागरिकों के पानी के अधिकारों को कानूनी रूप देगा। वर्षा की एक एक बूँद को सहेजने से लेकर उसके न्यायपूर्ण वितरण तक, सब कुछ कानूनी रूप से न सिर्फ परिभाषित होगा, अपितु सुनिश्चित भी किया जाएगा।

नए तालाबों का निर्माण-पुराने तालाबों का संवर्धन और संरक्षण तथा प्रदेश की सभी वाॅटर बाॅडी के कैचमेंट एरिया का प्रोटेक्शन एक्ट भी इस कानून का हिस्सा होगा। पानी का पुनः उपयोग (री-साइकलिंग), जल का जमीन में पुनर्भरण (वाटर रिचार्जिंग), उसका ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन मैनजमेंट प्लान, इत्यादि को भी इस कानून में समाहित किया जाएगा। 

इन सभी बातों के साथ इस बात को भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विभागों की पहली प्राथमिकता में पानी हो, अर्थात चाहे वो स्थानीय निकाय हो या ग्रामीण विकास, ‘पानी पहले’ की नीति पर काम करेंगे। 

इस कानून को वास्तविकता के धरातल पर लाने की पहली पहल कमलनाथ सरकार 24 जून 2019 को करने जा रही है जिसमें देश के बड़े जल शास्त्रियों के साथ विमर्श किया जाएगा। ततपश्चात एक जलसंसद का आयोजन किया जाएगा ताकि विशेषज्ञों से लेकर जनप्रतिनिधियों और आम जन, सभी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। 

एन आर डी डब्लू पी की गाइडलाइंस के अनुसार 55 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन पानी की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने का प्रावधान है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 5.88 करोड़ लोग गाँवो में 128231 बसाहटों में निवास करते हैं, जिसमें से 40 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को हम ‘नलजल योजना’ के माध्यम से पानी उपलब्ध करा पा रहे हैं। उसमें से भी मात्र 12 प्रतिशत ग्रामीण घरों में हम नल के माध्यम से सीधे घरों तक पानी पहुँचा पाते हैं। बाकी लगभग 60 प्रतिशत आबादी ट्यूबवैलों पर निर्भर हैं इनमें से भी 8 से 10 प्रतिशत बोरिंगों का पानी गर्मियों में नीचे चला जाता है। ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में परिवहन कर पानी गाँवों में उपलब्ध कराना होता है। 

इसी प्रकार मध्यप्रदेश में लगभग 2400 झीलें और तालाब हैं जिनमें 1 से 5 स्क्वेयर किलोमीटर के 150, 5 से 20 स्क्वेयर किलोमीटर के 22 और 20 स्क्वेयर किलोमीटर से अधिक के जलाशय हैं जिनकी जीवंतता उनके कैचमैंट एरिया पर निर्भर करती है। इसलिए आवश्यक है कि उनके कैचमैंट एरिया को प्रोटेक्ट किया जाए इसलिए ‘राइट टू वाटर एक्ट’ में कैचमेंट एरिया प्रोटेक्शन एक्ट को शामिल किया जाएगा। 

अंततः कमलनाथ सरकार प्रतिबद्ध है प्रदेश के नागरिकों की भविष्य की पानी की आवश्यक्तओं की प्रतिपूर्ति के लिए और हम चाहते हैं कि मध्यप्रदेश देश के ऐसे सभी सामाजिक और रचनात्मक सरोकारों का अगुआ बने, ताकि समूचे देश की राज्य सरकारें और देश की सरकार के लिए भी यह प्रेरणा बन पाए।

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