आरक्षण की घोषणा कमलनाथ की नीयत में खोट का प्रतीकः भगत सिंह कुशवाह
अभी तक क्यों लटका रखा था केन्द्र द्वारा घोषित सवर्ण आरक्षण
पिछड़े वर्ग को आरक्षण की बात चुनावी शगुफे के अलावा और कुछ नहीं
खबरनेशन/Khabarnation
भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस सरकार की नीयत में खोट है, इसी कारण केन्द्र द्वारा लागू गरीब सवर्णा के आरक्षण को लटकाने का भरसक प्रयत्न किया गया। भारी दबाव पड़ने के बाद कमलनाथ ने आज गरीब सवर्णो के आरक्षण को लागू करने की बात तो स्वीकार कर ली है लेकिन उसकी टाइमिंग स्वयं ही यह बताती है कि सरकार इस आरक्षण को लेकर ईमानदार नहीं है, वहीं दूसरी ओर पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का चुनावी शगुफा छोड़ दिया गया है। इसे शगुफा इसलिए कहना आवश्यक है क्योंकि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के इस विषय को आगे बढ़ाना नामुमकिन है। यह बात आज भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष भगतसिंह कुशवाह ने कही।
कुशवाह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए है। उन्होंने कहा है कि कमलनाथ जानते है कि पूर्व में भी इस प्रकार की घोषणाएं की जा चुकी है और चुनावी शोरगुल शांत होने के बाद वे कांग्रेस के नेताओं द्वारा भुला दी गयी हैं। इस प्रकार के आरक्षण संवैधानिक प्रक्रिया के बिना लागू नहीं हो सकते और कमलनाथ यह अच्छी तरह जानते है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व अब इस विषय पर मध्यप्रदेश विधानसभा भी कोई प्रस्ताव पारित नहीं कर सकती, इसलिए वोटों के लालच में कमलनाथ और कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग समाज को बरगलाने की कोशिश की है।
कुशवाह ने कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज कांग्रेस की इन सारी चालबाजियों को ठीक से समझता है और कांग्रेस से यह सवाल भी करता है कि जब मंडल आयोग ने ही 27 प्रतिशत आरक्षण की वकालत कर दी थी तो इतने वर्षों से कांग्रेस इसे लटकाए क्यों रखी। सच तो यह है कि पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के विषय पर भी कांग्रेस ने घटिया राजनीति की। इस आयोग को संवैधानिक दर्जा भाजपा सरकार आने के बाद दिया जा सका। यदि कांग्रेस ने पहले यह काम कर दिया होता तो आज पिछड़ा वर्ग समाज की समस्याओं का अध्ययन पूरा होकर उसके कल्याण की ठोस नीतियां बन चुकी होती।
कुशवाह ने कहा है कि वे कमलनाथ सरकार की इस चालबाजी की पोल खोलने के लिए अभियान चलायेंगे।