प्रदेश भर में किसान चौपालें संपन्न
खबरनेशन/Khabarnation
प्रदेश एवं केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से कराया रूबरू
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने बताया कि मोर्चा ने आज प्रदेश भर में किसान चौपाल आयोजित किया जिसमें प्रदेश शासन के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्टी पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रदेश एवं केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं, उपलब्धियों से रूबरू कराया।
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने आज शिवपुरी और ग्वालियर जिलों के विभिन्न ग्रामों की चैपालों में भाग लिया और किसानों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, उनके लाभ की जानकारी सांझा की। उन्होंने कहा कि किसानों का ऋण माफ करने के बजाय भाजपानीत एनडीए सरकार ने किसान के सशक्तिकरण, किसान की आय 2022 तक दोगुना करने की सुनिश्चित रणनीति अपनाई है। रावत ने कहा कि आजादी के बाद सरकारों का लक्ष्य कृषि उत्पादन बढ़ाना ही रहा है, लेकिन किसान की आय बढ़ाने, किसान का जोखिम कम करने की चिंता भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है। केंद्र सरकार ने कृषि का बजट 121082 करोड़ रू. से बढ़ाकर 211694 करोड़ रू. किया है। देश में 10 करोड़ किसानों का फसल बीमा किया गया। 5 करोड़ 80 लाख किसानों के दावों का भुगतान किया जा चुका है। सरकार ने किसानों को बीमा की राशि मिलने में विलंब होने की दशा में किसानों को ब्याज सहित भुगतान किये जाने का प्रावधान किया है।
प्रदेश शासन के मंत्री गौरीशंकर बिसेन बालाघाट, सांसद गणेश सिंह सतना, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतानारायण शर्मा होशंगाबाद, प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती राऊ, प्रदीप लारिया नरयावली, प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा उमरिया, वरिष्ठ नेता कमल पटैल हरदा, राघवेन्द्र गौतम सीहोर, विनोद जादौन संबलगढ़, प्रेम पटेल धार, कैलाश पाटीदार खण्डवा, पदमसिंह ठाकुर ने भोपाल ग्रामीण की चैपालों में किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं पर चर्चा की और सुझाव लिए।
किसान मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने ग्राम चौपालों में पहुँचकर फसल बीमा योजना को किसानों के लिए आर्थिक कवच बताया। मध्यप्रदेश में भावान्तर भुगतान, किसान समृद्धि योजना, संबल योजना को वरदान बताया। मध्यप्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में किसान मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने 9 हजार से अधिक चौपालों में भाग लिया और किसानों से रूबरू हुए। किसान पंचायतों में गांव-गांव में व्यस्तता के कारण देर रात तक सामाजिक उत्सव की फिजा बनी र