घूस देने वाले की भी खेर नहीं : संजर

राजनीति Jul 26, 2018

भ्रष्टाचार निवारण की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव

 
खबरनेशन/Khabarnation

                भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व सांसद आलोक संजर ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण कानून 1988 की अपंगता दूर करने के लिए ऐतिहासिक संशोधन किया है, जिससे अब घूस लेने वाले के साथ घूस देने वाला भी दंड का भागीदार होगा। प्रचलित भ्रष्टाचार निवारण कानून में रिश्वत लेना अपराध माना गया है, लेकिन संसद ने जिस भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक को पारित किया है उसमें रिश्वत देना भी अपराध माना गया है। संशोधन के फलस्वरूप रिश्वत देने वाले को भी परिभाषित कर दिया गया है। संशोधन में ईमानदार कर्मचारियों को संरक्षण देने का भी प्रावधान किया गया है।

                उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण संशोधन में पांच वर्षो का समय लगा है। इसे 2013 में पेश किया गया था। इसके बाद स्थायी समिति ने सिलसिलेवार चर्चा की। प्रवर समिति ने भी विचार विमर्श किया। बाद में विधेयक ने विधि आयोग का भी लंबा सफर पूरा किया। 2016 में विस्तार से रिपोर्ट सौंपी गयी। इसके बाद मोदी सरकार ने इसे दोबारा 2017 में संसद में प्रस्तुत किया। लोक सेवकों पर इस कानून के अमल में केन्द्र के मामले में लोकपाल और राज्य में लोकायुक्त से अनुमति लेना होगी। रिश्वत लेने वालों को अपनी बात रखने के लिए एक सप्ताह का समय मिलेगा। जांच के दौरान यह भी देखा जायेगा कि रिश्वत किन परिस्थितियों में दी गयी।

                 संजर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक को कानूनी शक्ल देने के लिए बधाई दी है। संशोधन के इस विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के साथ ही यह संशोधन विधेयक कानून के रूप में अमल में आ जायेगा।

 

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