शिवराज सरकार यदि ईमानदार है तो बतायें पुल-पुलिया, नहरें और सड़कें ध्वस्त क्यों हो रही हैं : कांग्रेस
खबर नेशन / Khabar Nation
एक साल पहले ही बने मंडीदीप के एमपीआरडीसी द्वारा निर्मित पुल के ध्वस्त होने पर मुख्यमंत्री दें इस्तीफा, क्योंकि वे एमपीआरडीसी के चेयरमेन हैं
भोपाल: प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के.के मिश्रा ने भोपाल-जबलपुर हाईवे मार्ग पर मंडीदीप के समीप कलियासोत पर एक साल पहले ही बने और एमपीआरडीसी द्वारा निर्मित 529 करोड़ के पुल के ध्वस्त हो जाने पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से इस्तीफा मांगा है, क्योंकि वे ही एमपीआरडीसी के चेयरमेन हैं! उन्होंने कहा कि चेयरमेन होने के नाते मुख्यमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि भ्रष्टाचार को लेकर उनके जीरो टॉलरेंस का क्या यही प्रमाण है? क्या मात्र एक मैनेजर को सस्पेंड कर देने से वास्तविक दोषियों को बचाया जा रहा है? क्या इस पुल के निर्माण के वक्त एमपीआरडीसी के समूचे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, एमडी, चीफ इंजीनियर और निर्माण को सर्टिफाई करने वाले अधिकारियों के नाम और उनकी भूमिका को सरकार सार्वजनिक करेगी? क्या मुख्यमंत्री इससे जुड़े अधिकारियों को अब जमीन में गाडेगें? क्या इससे जुड़े सभी लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा 13 के तहत सरकार प्रकरण दर्ज करायेगी या ईओडब्ल्यू स्वतः संज्ञान लेकर प्रकरण दर्ज करेगा?
श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री यह भी बतायें कि गत् वर्ष दतिया में सिंध नदी के बहाव में करोड़ों की लागत से बने जो दो नवनिर्मित पुल ध्वस्त हुये थे उनके दोषियों पर अब तक क्या कार्यवाही की गई, नहीं हुई तो क्यों और उन्हें किसके संरक्षण में बचाया जा रहा है? इन घटनाओं से सरकार ने सबक क्यों नहीं लिया, क्या सरकार खुद इन भ्रष्टाचारों में शामिल है? सरकार में बैठे जिम्मेदारों पर आरोप लगाते हुए मिश्रा ने कहा कि दतिया में निर्मित इन पुलों के ध्वस्त होने के एक जिम्मेदार ग्वालियर में पदस्थ पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर एनपी कोरी जो वर्षों तक वहां चीफ इंजीनियरिंग का चार्ज संभाले रहे, उन्हें दतिया ले जाकर चीफ इंजीनियर की पोस्टिंग करवाने वाले राजनेता कौन थे? उनकी इस पोस्टिंग को करवाने में भिंड के एक बड़े ठेकेदार की भूमिका क्या थी?
श्री मिश्रा ने कहा कि इसी प्रकार प्रदेश की राजधानी भोपाल के सिंगारचोली मुबारकपुर प्रोजेक्ट के आसाराम ग्रेड सेपरेटर की जो डिजाइन एनएचएआई ने अप्रूव की थी, 221 करोड़ रूपये के इस प्रोजेक्ट का उस अनुसार काम क्यों नहीं हुआ? ठेका लेने वाली सीडीएस इंफ्रा ने डिजाइन में बदलाव किसके संरक्षण में किये, पुल ध्वस्त कैसे हुआ? शिवराज सरकार के दौरान बुंदेलखंड में 881 करोड़ रूपयों के बांध कैसे फूटे, नहरें लापता कैंसे हुईं, 210 करोड़ रूपये की लागत से छतरपुर में 85, टीकमगढ 65, दमोह 53, दतिया 28, पन्ना 35 और सागर में 84 स्टाप डेम के 350 निर्माण कार्यों में हुये भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन है? इस जांच का खुलासा तो मुख्य तकनीकी परीक्षक की रिपोर्ट से हुआ था।
श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री विदेशों में जाकर मप्र की सड़कों को अमेरिका से बेहतर बताते हैं। 30 मई 2018 को उन्होंने मंदसौर में कहा कि अब प्रदेश में सड़कें ऐसी बना दी हैं कि पेट का पानी भी नहीं हिलता हैं, किंतु प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में एक ही बारिश में सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यही नहीं देश की सर्वोच्च अदालत ने तो यहां तक कह दिया है कि आतंकी हमलों से ज्यादा गड्ढों के कारण हादसों में मौतें हुई हैं। राजधानी भोपाल में ही एक साल में औसत 20 से 25 मौंते खराब सड़कों पर हादसों के कारण हो रही हैं, मुख्यमंत्री जी बतायें क्या भ्रष्टाचार को लेकर उनका जीरो टॉलरेंस यही है?
कांग्रेस की मांग है कि प्रदेश में करोड़ों रूपयों के व्यय होने के बाद भी लगातार धराशायी हुये पुल-पुलियांओं, नहरों, स्टाप डेमों और सड़कों के निर्माण में हुये व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच प्रधानमंत्री करवायें, क्योंकि 15 अगस्त 2014 को उन्होंने ही लाल किले की प्राचीर से देश को साक्षी मानते हुए “न खाउंगा न खाने दूंगा” का वचन दिया था! आखिरकार क्या कारण है कि इतने बड़े करोड़ों-अरबों रूपयों के भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा का अनुषांगिक संगठन प्रवर्तन निदेशालय ईडी, और सीबीआई खामोश हैं| हमारी यह भी मांग है कि पिछले 17 सालां में एमपीआरडीसी में जितने भी एमडी और चीफ इंजीनियर पदस्थ रहे हैं, उनकी संपत्तियों की जांच हो, क्योंकि जनधन से एकत्र हजारों करोड़ रूपयों की निर्माण के नाम पर हुई प्रशासनिक और राजनैतिक डकैती के माल को डकारने वाले कौन हैं?
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गौरव चतुर्वेदी
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