दुर्भाग्य है, चुनाव आयोग भी निष्पक्ष साबित नहीं हुआ: कांग्रेस
खबर नेशन / Khabar Nation
वही हुआ, जिसका कांग्रेस को अंदेशा था !
कांग्रेस ने कहा, जिला पंचायत निर्वाचन अवैध, पुनर्मतदान हो
भोपाल: प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के.के मिश्रा ने आज राजधानी भोपाल में अवैध रूप से संपन्न जिला पंचायत निर्वाचन चुनाव को शिवराज सरकार के इशारे पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा की गई लोकतंत्र की हत्या निरूपित करते हुए कहा कि विडंबना है कि जो राज्य सरकार 18 वर्षों से सत्ता में काबिज है, उसे पंचायत, निकाय, जिला और जनपद के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के संपन्न चुनाव में बेतहाशा पराजय का स्वाद चखने के बाद जिला पंचायत के निर्वाचन में सरकारी आतंकवाद, धनबल के दुरूपयोग और राजनैतिक गुंडागिर्दी के माध्यम से अपने पक्ष में अवैध निर्वाचन करवाना पड़ा। उन्होंने कहा कि निर्वाचन को लेकर आज जो परिस्थितियां निर्मित हुई हैं मतदान के 24 घंटे पहले ही कांग्रेस नेताओं ने उसका अंदेशा जता दिया था और वहीं हुआ भी! श्री मिश्रा ने राज्य निर्वाचन आयोग को भी असहाय, अकर्मण्य और भाजपाई एजेंट बताते हुए कहा कि वह भी अपना संवैधानिक चरित्र निष्पक्षता से प्रस्तुत नहीं कर सका।
श्री मिश्रा ने इस निर्वाचन को पूरी तरह अवैध बताते हुए माननीय जिला न्यायालय की निगरानी में पुनर्मतदान की मांग करते हुए कहा कि क्या तिरंगा लगे हुए मंत्रियों के सरकारी वाहन में मंत्रियों, विधायकों, आयोगों के पूर्व अध्यक्षों के संरक्षण में मतदाताओं को मतदान स्थल तक लाना कहां तक न्यायोचित है, महिला मतदाता को पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा द्वारा महिला पुलिसकर्मी के रूप में उन्हें पकड़ते हुए मतदान स्थल तक ले जाना किस महिला अस्मिता का सम्मान है? भोपाल कलेक्टर पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए मिश्रा ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पर बंधक बनाये गये कांग्रेस समर्थित चार मतदाताओं के फर्जी शपथ पत्र बनवाकर भाजपा नेताओं से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर भाजपा प्रत्याशी को विजयी घोषित करवाया, जबकि प्रॉक्सी वोट तब ही डलवाया जा सकता है जब मतदाता स्वयं निःशक्त, दिव्यांग, दृष्टिबाधित या किसी शासकीय चिकित्सालय द्वारा उसे अशक्त घोषित किया गया हो। इन स्थितियों में उनका निकटस्थ व्यक्ति ही उक्त वर्णित परिस्थितियों में प्रॉक्सी मतदान कर सकता है। ऐसा न कर कलेक्टर ने राज्य सरकार व भाजपा के दबाव में अनैतिक संवैधानिक आचरण किया है। लिहाजा, उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के रूप में स्वतः निर्वाचन प्रक्रिया को अवैधता प्रदान कर दी है? अतः समूची चुनाव प्रक्रिया को अवैध घोषित कर पुर्नमतदान कराया जाये।
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गौरव चतुर्वेदी
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