अण्डे के फंडे की लड़ाई,अब अण्डे और बच्चे की लड़ाई व सत्ता के संग्राम में तब्दील! - कांग्रेस
खबर नेशन / Khabar Nation
वे कौन अफसर व ठेकेदार हैं जो बार-बार सरकार पर बच्चों को अण्डा-चिकन परोसने का दबाव बना रहे हैं?
कुपोषण से लाखों बच्चों की मौतें,आंगनवाडियों के बच्चों की थाली खाली, तब सुधारगृहों में अण्डा-चिकन क्यों?
भोपाल: प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के के मिश्रा ने मप्र किशोर न्यायालय नियम -2022 के नये मानकों के अनुसार राज्य के डेढ़ सौ से अधिक बाल सुधार-सम्प्रेषण गृहों में किशोरों को अब अण्डा-चिकन परोसने पर सवालिया निशान लगाया है! उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रदेश में पिछले 17 सालों में कुपोषण से लाखों बच्चे असामयिक मौत के शिकार हो चुके हैं,जिसे मुख्यमंत्री जी ने भी अपने माथे पर लगे एक कलंक के रूप में स्वीकार किया है,भ्रष्टाचार के चलते आंगनवाडियों के बच्चों की थाली खाली है और सुधारगृहों में बच्चों को अण्डा-चिकन? यह किसकी और कौन सी सकारात्मक दिमागी सोच है?
मिश्रा ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, जिनके पास महिला और बाल विकास मंत्रालय का भी प्रभार है, से जानना चाहा है कि आखिरकार वे कौन ठेकेदार - अफसर हैं जो सरकार पर बार-बार अण्डा-चिकन परोसने का दबाव बनाते हैं?
मिश्रा ने सरकार से यह भी पूछा है कि जब कहा जा रहा है कि इस विषयक अधिसूचना भी गत 25 अगस्त को जारी हो चुकी है तो गृहमंत्री और सरकार के प्रवक्ता डॉ नरोत्तम मिश्रा, मुख्यमंत्री के ही इस निर्णय के खिलाफ क्यों उतर आये, उन्हें यह क्यों कहना पड़ा कि प्रदेश में अण्डे का फंडा नहीं चलेगा, यह अण्डे और बच्चे की लड़ाई क्या सत्ता के संग्राम में तब्दील हो गई है या सीएम को दी गई खुली चुनौती है?
मिश्रा ने अपने इसी बयान में प्रदेश के राजनैतिक हालातों पर भी चुटकी लेते हुये कहा कि मंत्रीगण नौकरशाही को लेकर सीएम पर दबाव बना रहे हैं, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, विधायकगण भी गम्भीर विषयों पर पत्राचार कर रहे हैं, इसी बीच शनिवार को सीएम को अपनी मंत्री मन्डलीय व सोशल मीडिया आर्मी के संयुक्त तत्वावधान में "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" की मुहिम चलानी पडी! आखिरकार माजरा क्या है?
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गौरव चतुर्वेदी
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