आदिवासियों के लिए संचालित जैविक खेती योजना में सरकार ने किया सौ करोड़ रू. से अधिक का भ्रष्टाचार: पुनीत टंडन
खबर नेशन / Khabar Nation
भोपाल: प्रदेश कांग्रेस सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पुनीत टंडन और प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं प्रकोष्ठों के प्रभारी जे.पी. धनोपिया ने आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा आदिवासियों के लिए संचालित जैविक खेती योजना में सौ करोड़ रूपयों से अधिक का भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ भ्रष्टाचार के इस मामले में पहले भी 2 बार पत्रकार वार्ता के माध्यम से घोटाले की परते सामने ला चुका है। पार्टी के विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले ने भी इस मामले को विधानसभा में मुखरता से उठाया था। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016-17 में प्रदेश के आदिवासियों में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु रूपये 54 करोड़ स्वीकृत किए। इसी प्रकार विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा, भारिया एवं सहरिया) हेतु रूपए 20 करोड़ स्वीकृत किए। इसके अतिरिक्त राज्य मद से 36 करोड़ दिए गए हैं। भारत सरकार को भेजे गए प्रोजेक्ट में सेसबानिया बीज के स्थान पर सेसबानिया रोस्ट्रेट नामक बीज का नाम शामिल किया गया, जबकि सेसबानिया रोस्ट्रेट नामक बीज भारत में जैविक खेती हेतु भारत सरकार की परम्परागत कृषि विकास योजना की गाइडलाईन में शामिल नहीं है।
श्री टंडन ने कहा कि भारत सरकार से सेसबनिया रोस्ट्रेटा (टिन्डर दर 114/- रूपये प्रतिकिलो) स्वीकृत कराया गया, जबकि वितरण के समय मंडला जिले में 25 से 30 रूपये किलो मिलने वाला चा बीज बांटा गया। भारत सरकार से दो अलग-अलग राशियाँ 54 करोड़ आदिवासियों के लिए औ 20 करोड़ विशेष पिछड़े (बैगा, भारिया, सहरिया) आदिवासियों के लिए मिली थी औ इसका उपयोग अलग-अलग हितग्राहियों के लिए किया जाना चाहिये था। इसमें 36 करोड़ की राशि राज्य मद से भी जोड़ी गई थी। लेकिन आरटीआई में प्राप्त किसानों की सूची में डिंडोरी, अनूपपुर ओर मंडला मं दोनों राशियों के विरुद्ध एक ही सूची जिससे प्रतीत होता है कि एक आदिवासी को लाभान्वित करने के लिए दो जगह भुगतान किया गया है, जो गबन तथा फर्जी सूचियाँ बनाने के अपराध की ओर इशारा करता है।
इसमें म.प्र. कांग्रेस कमेटी, का अधिकार प्रकोष्ठ के अध पुनीत टंडन द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को शिकायत की गई। आयोग द्वारा फर्जी सूची मामले को संज्ञान में लेने के बाद जॉच के लिए मुख्य सचिव मप्र शासन को नोटिस जारी किया गया। जिसके संबंध में कलेक्टर मंडला द्वारा जाँच की गई। जाँच में पाया गया है कि अनेकों ग्रामों के लाभान्वितों की सूची में ब्राम्हण, कुर्मी, लोहार, मेहरा इत्यादि जातियों के व्यक्तियों के नाम शामिल है।
1. योजना में ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से गाईड लाईन बदली गई जिसके लिए कृषि विभाग के मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदार है।
2. भारत सरकार से स्वीकृत के पश्चात ठेकेदारों को मदद कर भ्रष्टाचार करने हेतु वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के स्थान पर प्रोम खाद तथा जैविक कीट नाशक प्रदाय की स्वीकृति भ्रष्ट तरीके से दी गई ताकि सत्यापन न हो सके।
हितग्राहियों को जैविक सामग्री का लाभ नहीं मिला और इनको यह भी नहीं मालूम कि इनके नाम लाभान्वितों की सूची में कैसे आए। इससे स्पष्ट है कि झूठी हितग्राही सूची बनाकर राशि का गबन किया गया है। बाद में एक अन्य काल्पनिक सूची बनाकर लीपापोती की गई है। यह फर्जी शासकीय अभिलेख बनाने व उसमें हेराफेरी का मामला है। जाँच दल द्वारा यह जाँच नहीं की गई कि उपसंचालक, कृषि एंव आत्मा परियोजना मंडला के कार्यालय में जो सूची उपलब्ध हैं, उनके हितग्राहियों को जैविक सामग्री प्रदान की गई अथवा नहीं। यदि सामग्री दी भी गई तो क्या-क्या सामग्री दी गई। जांच रिपोर्ट का बिंदु क्रमांक-6 जॉच दल ने बिंदु क्रमांक -6 में 165 हितग्राहियों के नाम पर दो राशियों का आहरण किया जाना सिद्ध पाया गया है।
खास बात यह है कि जॉच रिपोर्ट में दोहरा आहरण सिद्ध पाए जाने के बावजूद दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं करायी जा रही है। इस मामले में होना तो यह चाहिए कि सर्वप्रथम अभिलेख जब्त कराए जाए नहीं तो मूल अभिलेख नष्ट कर दिए जायेंगे।
हमारी मांग है कि:-
1. संपूर्ण मंडला जिले में रेन्डम तरीके से अधिक से अधिक ग्रामों की जांच कराई जाए।
2. यह योजना प्रदेश के 20 आदिवासी बाहुल्य जिलों में संचालित की गई थी जाँच में जिस तरह का भ्रष्टाचार मंडला जिले में सामने आया है, उसी त अन्य 19 जिलों में भी भ्रष्टाचार होना संभावित है, इसलिये शेष 19 जिलों भी जाँच कराई जाए।
3. योजना में मन चाहे बदलाव के लिए जिम्मेदारों पर एफआईआर की जाए।
4. योजना में आदिवासी जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग कर बेचने के सपने दिखाये गये थे किन्तु एक भी उपज को ब्रांडिंग नहीं हुई है पूरी राशि रूपये 110/- करोड़ का बंदरबाट हुआ इसकी एफआईआर कराई जाए।
5. आयोग के निर्देश पर जो जॉच हुई है उसमें पाई गई अनियमितताओं पर तत्काल एफआईआर कराई जाए।
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गौरव चतुर्वेदी
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