अभिव्यक्ति को आजादी का मतलब मजहबों में नफरल का तड़का लगाने की स्वतंत्रता नहीं
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि भारतीय सेना वास्तव में देश की धर्मनिरपेक्षता का जीवंत उदाहरण है। जवान राष्ट्र की रक्षा में प्राण न्यौछावर करते है। उनके सामने कोई मजहब नहीं होता। उनका जज्बा और जुनून मातृभूमि और देश की जनता की हिफाजत में फना हो जाना होता है लेकिन कुछ लोग इसे मजहबी रंग देकर अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में मजहबों में नफरत का तड़का लगाकर आत्मतुष्टि करते है जो निदंनीय है।
उन्होंने कहा कि आल इंडिया मजलिस ए इंतेहाद मुस्लिमस के सांसद असदुद्दीन औवेसी अपनी सियासत चमकाने के लिए जिस तरह फौज को मजहबी रंग दे रहें है न तो मजहब का रूतबा बड़ा रहे है और न अल्पसंख्यकों का उपकार कर रहें है। उल्टे मजहबों के बीच में दूरी कायम करने और अपने को मजहब का रहनुमा दिखाने का घृणित प्रयास कर रहें है।
डॉ. विजयवर्गीय ने कहा कि आतंकवाद को कमजोर करने की पड़ोसी देश की घृणित कोशिश है जिसे फौजी जवान नाकाम करने में जान हथेली पर रखकर जुटे हुए है। ओवैसी ने जम्मू कश्मीर में शहीद हुए जवानों को जिस तरह मजहबी नजरिए से देखा है यह भारतीय जवानों का अपमान है। ऐसी संकीर्ण सोच की भारतीय संविधान इजाजत नहीं देता। ओवैसी का कृत्य सर्वधर्म समभाव के प्रतिकूल और दंडनीय है जिसकी निंदा की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो देश में युवकों से वंदे मातरम कहने का आव्हान किया गया इसमें न तो कहीं जोर जबरदस्ती थी और न कोई दबाव था। ऐसा करना तो हर राष्ट्रप्रेमी का कत्र्तव्य है लेकिन औवेसी ने इस आव्हान का भी राजनीतिकरण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दरअसल वंदे मातरम बोलने को उन्होंने इस तरह पेश कर दिया मानो आवाम को आतंकित किया जा रहा है। इस तरह बात बात पर अल्पसंख्यकों में खौफ पैदा कर अपनी सियासत चमकाने में लगा रहना औवेसी का शगल बन गया है। जिसे देश और समाज कतई स्वीकार नहीं करता। भारत की फौज दुनिया की श्रेष्ठतम फौज है। ओवैसी को इसे मजहबी चश्में से देखना बंद करना चाहिए। (खबरनेशन / Khabarnation)