उपेक्षित कार्यकर्ता की अनापेक्षित मौत
सचमुच शिव सा सरल क्रोधी भोला और निष्ठावान था उमेश शर्मा
खबर नेशन /Khabar Nation
राजनीति में लगातार योग्यता का दमन होते देखना हो तो एक उदाहरण के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता उमेश शर्मा को देखा जा सकता है। आज भाजपा ने एक बेहतरीन प्रवक्ता मे छुपी राजनीतिक संभावनाओं को खो दिया ।
राजनीति में इस तरह के चरित्र बहुत ही कम होते हैं, लेकिन हम जैसों का दिल जीतने में सफल हो जाते हैं। यह बात आज साबित भी हो रही है । आज परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का भी निधन हो गया। जब लिखने बैठा लिखने का विचार सिर्फ उमेश शर्मा के प्रति ही आया । उमेश हमेशा एक समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता के तौर पर अमर हो गया । स्कूली जमाने से बेहतर डिबेटर के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले उमेश ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा । तब भाजपा सत्ता के लिए नहीं आम भारतीय के मन में जगह बनाने का संघर्ष कर रही थी । युवा अवस्था में ही उमेश शर्मा ने अपने पिता को खो दिया । उमेश निष्ठावान कार्यकर्ता की तौर पर अपने पिता के अंतिम संस्कार कर वापस पार्टी के काम में जुट गए। मां बिलखती रही पर उमेश ने संगठन कार्य को महत्व दिया। जब पार्टी को कुछ देने का वक्त आया तो भाजपा इधर उधर किसी और को आगे बढ़ाती रही । मन में पीड़ा को लेकर उमेश शर्मा क्रोधित हो मुखर भी हुए लेकिन कुछ ही पल में अपनी नाराजगी को भुला पार्टी के कार्य में जुट गए । कोराना संक्रमण काल के दौरान लगातार एक खुले मैदान में 24 घंटे भोजन बनवा कर जरूरतमंद तक पहुंचाने के लिए उमेश शिद्दत से कार्य में जुटे रहे । इस शख्स की सुध भाजपा ने पद देने के दौरान नहीं की ।
कह सकते हैं उमेश शिव सा सरल ,क्रोधी ,भोला और निष्ठावान था । आखिर उमेश का मतलब भी शिव ही होता है ।
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