पत्रकार नहीं विश्वविद्यालय हैं दीक्षित सर
सादगी और सरलता का सफर.....
खबर नेशन / Khabar Nation
कुछ व्यक्ति और उनका व्यक्तित्व ऐसा होता है जिन पर लिखना बहुत कठिन होता है। कठिन इसलिए क्योंकि उनमें इतनी अच्छाइयां होती हैं कि आप को लगता है क्या लिखा और क्या छोड़ा जाए। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं आदरणीय कमल दीक्षित सर।
मैंने अब तक के अपने ढाई दशक लंबे पत्रकारिता जीवन में पुरानी पीढ़ी के जिन पत्रकारों से खुद को बहुत प्रभावित पाया है उनमें से एक कमलजी भी हैं। बात कोई ग्यारह-बारह साल पुरानी है जब एक आयोजन में पहली बार उनसे मिला था। नाम बहुत सुन रखा था उनका। बड़े अखबारों के संपादक रह चुके थे इसलिए मुझे लगता था कि काफी तामझाम रहता होगा उनके साथ। बात तो क्या ही हो पाएगी। मेरी यह धारणा उस वक्त गलत साबित हो गई जब कुर्ता-पायजामा धारी दीक्षित सर ने मुझ से पहली मुलाकात में ही बहुत आत्मीयता से बात की। अगर कहूं कि मुझे अपना बना लिया तो गलत नहीं होगा। बस, यही सरलता, सादगी और आत्मीयता आदरणीय सर के व्यक्तित्व की विशेषता है। इस विशेषता के कारण ही जो भी एक बार उनसे जुड़ा फिर कभी अलग नहीं हो पाया।
जैसा उनका व्यवहार है वैसा ही जीवन, लेखन और विचार भी। कई बार मैं उनसे मिला, उनको पढ़ा, उनको सुना। हर बार यही लगा कि उनका दृष्टिकोण साफ-सुधरा, स्पष्ट और सकारात्मक है। अच्छा सोचना, अच्छा बोलना और अच्छा ही लिखना उनकी आदत है। आज भी वह मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता को ना केवल जीवित रखने के प्रयास में सतत जुटे रहते हैं बल्कि मूल्यानुगत मीडिया की मशाल थामे हुए हैं। जब मिलते हैं या बात होती है तो बातों का केंद्र बिंदु ज्यादातर यही रहता है - क्या अच्छा हो सकता है, हम क्या और कितना अच्छा कर सकते हैं।
नर्मदा किनारे होशंगाबाद जिले के एक छोटे से ग्राम में 1947 में जन्मे प्रोफेसर कमल दीक्षित ने देश की पत्रकारिता में ही नहीं बल्कि खासकर ग्रामीण पत्रकारिता में एक संस्था की तरह काम किया है ।सिर्फ प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में उनके असंख्य संख्या में शिष्य हैं । जो प्रोफेसर कमल दीक्षित की सिखाई पत्रकारिता का परचम लहरा रहे हैं । भोपाल इटारसी और नागपुर में अपनी शिक्षा पूर्ण करने वाले श्री दीक्षित भूगोल में उत्तर स्नातक तथा पत्रकारिता उपाधि का शिक्षण और गांधी साहित्य पर पत्रोपाधि हैं । 50 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय एवं मार्गदर्शक की भूमिका में रहकर वर्तमान में मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति इंदौर के राष्ट्रीय संयोजक हैं । राजी खुशी नामक अध्यात्म मासिक पत्रिका के संपादक का दायित्व निभाने के साथ-साथ श्री दीक्षित मूल्यांकन मीडिया मासिक पत्रिका का संपादन कार्य भी कर रहे हैं । प्रोफेसर दीक्षित ब्रह्मा कुमारीज माउंट आबू की मीडिया विंग की कोर कमेटी के सदस्य भी हैं। देश के प्रमुख अखबार राजस्थान पत्रिका जयपुर , नवभारत इंदौर - भोपाल, पूर्व निर्देशक भास्कर एकेडमी जयपुर भोपाल , पूर्व प्रोफेसर पत्रकारिता विभाग माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल , पूर्व प्राचार्य कर्मवीर विद्यापीठ खंडवा , मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता, ग्रामीण पत्रकारिता, विकास पत्रकारिता पर संगोष्ठी प्रशिक्षण कार्यशाला एवं शोध मार्गदर्शन के साथ साथ प्रबोधक तथा प्रेरक व्याख्यान कर्ता के रुप में भी उन्हें देखा,सुना और गुना जा सकता है ।
मुझे यह जानकर बेहद खुशी हो रही है कि आदरणीय दीक्षित सर की एक और कृति का प्रकाशन होने जा रहा है। उन्हें बधाई, उनकी कलम यूं ही चलती रहे और हमें मार्गदर्शन मिलता रहे। सादर प्रणाम सर।
*- मुकेश तिवारी, इंदौर*