इप्टा ने रणवीर सिंह को किया याद....

शख्सियत Aug 28, 2022

खबर नेशन / Khabar Nation
इंदौर: राजघराने से संबद्ध रहे रणजीत सिंह ने अपने व्यक्तित्व को आमजन के सरोकार से जोड़ा था। कला व नाटकों के क्षेत्र में वे प्रतिरोध के स्तंभ थे। उनका निधन संस्कृति के क्षेत्र की बड़ी क्षति है।

यह विचार व्यक्त किए प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य महा सचिव शैलेंद्र शैली ने, वे भारतीय जन नाट्य संघ ( इप्टा )के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ख्याति प्राप्त रंगकर्मी, लेखक रणवीर सिंह के निधन पर इंदौर की प्रलेसं एंव इप्टा इकाई द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रणवीर सिंह जी का व्यक्तित्व गरिमा पूर्ण था। निडरता और जिंदादिली के साथ उन्होंने देश में इप्टा का नेतृत्व किया। रणवीर सिंह जी चाहते थे कि प्रलेसं नाट्य विधा पर कार्यशाला आयोजित करे, नए नाटक लिखे जाएं। वे हमारे समय के इतिहास के गौरवशाली दस्तावेज हैं।

प्रलेसं राष्ट्रीय सचिव मंडल के सदस्य विनीत तिवारी ने कहा कि रणवीर सिंह जी ने लंबा स्वस्थ और उद्देश्य पूर्ण जीवन जिया। स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद भी वे मई माह में इंदौर आए और ढाई आखर प्रेम यात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए। वे हमारे समय के प्रतिरोध की प्रमुख धारा थे। उन्होंने संस्कृत के नाटकों को लोक जीवन से जोड़ा। वे नाट्य अध्येता थे। पारसी थियेटर पर उन्होंने बड़ा काम किया। पारसी थिएटर से चली उनकी जीवन यात्रा आधुनिक थिएटर से होते हुए  इप्टा तक पहुंची थी। वर्ष 1985 में जब राजेंद्र रघुवंशी ने इप्टा का पुनर्गठन किया तब रणवीर सिंह जी भी इप्टा से जुड़े। उनका आरोप था कि देश की स्वतंत्रता के 75 वर्षों में किसी भी सरकार ने सांस्कृतिक नीति नहीं बनाई है। इसे हेतु उन्होंने एक मसौदा भी तैयार किया था, ताकि देश की भावी पीढ़ी सुसंस्कृत और जिम्मेदार बन सके और लेखकों, संस्कृति कर्मियों का जीवन भी आसान हो सके। वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए वे सदैव चिंतित रहते थे। विनीत तिवारी ने पारसी थियेटर पर लिखी उनकी पुस्तक के कुछ अंशों का वाचन किया।

सभा में विवेक मेहता, सारिका श्रीवास्तव, हरनाम सिंह ने उनके संबंध में अनेक संस्मरणो के माध्यम से उन्हें उन्हें याद किया। इस अवसर पर बिहान संवाद के रवि शंकर, प्रलेसं इकाई के केसरी सिंह चिराड़, राम आसरे पांडे, सागर से आए पीआर मलैया, राज लोगरे वरिष्ठ पत्रकार जावेद आलम भी उपस्थित थे।

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