जाल सभागृह में इस्लाम शांति और अनेकतावाद पर व्याख्यान
इंदौर।बीती शाम जाल सभागृह पर इंसानियत की भलाई की सच्चे मायने में फिक्र की गई।साबरी साजिदी फाउंडेशन की मेज़बानी में "रोशनी सबके लिये" उनवान पर महफ़िल सजी।
जिसमें बतौर ख़ास मेहमान मुबई के सूफी सय्यद साजिद अली मियाँ साहब ने शिरकत की। परिचर्चा में,देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति नरेंद्रसिंह धाकड़, दिल्ली यूनिवर्सटी के प्रोफेसर डाक्टर सैयद फ़ज़लउल्लाह चिश्ती साहब ने इस्लाम, शांति और अनेकवाद पर
व्याख्यान दिया।गांधी विचारक अनिल त्रिवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।पत्रकार आदिल सईद ने बहुत खूबसूरत अंदाज़ में सारगर्भित तरीके से विषय प्रवर्तन किया। हाजी गजनफर ने स्वागत भाषण दिया।साबरी साजिदी फाउंडेशन इंदौर के सचिव अशफ़ाक़ लोधी ने बताया मज़हब को लेकर जो गलतफहमियां है उसे दूर करने और दूरियों को नज़दीकियों में बदलने के मकसद से वैचारिक आयोजन रखा गया।अशफ़ाक़ लोधी ने कार्यक्रम का संचालन करते हए ये शेर सुनाया-
वो दिलों में आग लगाएगा मैं, दिलों की आग बुझाऊंगा,
उसे अपने काम से काम है, मुझे अपने काम से काम है।
अशफ़ाक़ लोधी ने जिस नफ़रत और दूरी को ख़त्म करने की कोशिश में जो महफ़िल सजाई थी, बोलने वाले उसकी जड़ तक पहुंच गए। इस महफ़िल की कामयाबी ये थी कि इसमें सुनने वाले सभी रंग के थे। लोधी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डॉक्टर सैयद फ़ज़लउल्लाह ने आयोजकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा इतने अहम विषय पर कार्यक्रम रखा जो वक़्त की ज़रूरत है।उन्होंने कहा हर धर्म मे ऐसे लोग भी हैं जो वसुधैव कुटुम्बकम के साथ बैठकर रहना चाहते हैं।क़ुरआन तमाम इंसानों की भलाई के लिए है क्योंकि 300 से ज़्यादा मर्तबा क़ुरआन में इंसानो को लेकर संबोधित किया गया है।मुसलमानों को लेकर 17 बार ज़िक्र है।त्यौहार क्यों मनाये जाते हैं हिन्दू मुस्लिम और सभी धर्म के लोग एक दूसरे के बारे में जाने ताकि दूरियों को गलतफहमियों को खत्म किया जा सके।ज़बरदस्ती किसी पर कुछ मत थोपो,ये धर्म नहीं है।आप अपने धर्म पर रहिये और दूसरे धर्म को जानने की कोशिश करें।भूखे लोगों को खाना खिलाओ किसी भी धर्म का हो।
फ़ज़्लुल्लाह को इस्लाम, शांति और अनेकतावाद पर बोलने के लिए बुलाया था। उन्हें रामायण और गीता की गहरी जानकारी है और ढेरों श्लोक मुँह जबानी याद है। जिसका इस्तेमाल वो भाषण में कर रहे थे। वे कह रहे थे कि परेशानी ये है कि लोग एक-दूसरे के धर्म को समझते नहीं हैं और उनके खिलाफ हो जाते हैं। उन्होंने मुसलमानों को कहा कि उनके बच्चे भी इस्लाम को गूगल और वाट्सअप से जान रहे हैं।इस्लाम में दूसरे मज़हबों के लिए कितनी जगह है,लोगों को यह पता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि आंतकवाद इस्लामी कानून के हिसाब से भी सही नहीं है और जिहाद के नाम पर जो लोग खून-खराबा कर रहे हैं वो भी गलत है। जिहाद के अलग कानून-कायदे हैं जिसके हिसाब से जिहाद किया जाता है। वे कह रहे थे कि इस्लाम में कई जटिल मुद्दों के आसान हल है लेकिन 99 फीसद लोगों को पता ही नहीं है, बस कुछ लड़के वाट्सअप- गूगल से इस्लाम समझ कर गलत दिशा में जा रहे हैं, ये गूगल यूनिवर्सिटी और वाट्सअप कॉलेज बन्द हो जाना चाहिए, लोगों को किताबें पढ़ना चाहिए, दूसरे धर्मों की किताबें भी विशेषज्ञता के साथ पढ़ना चाहिए ताकि हम उसे जान सकें। उन्होंने इतिहास के पन्ने पलटते हुए कहा कि जिस दौर के बारें में बता कर नफरत फैलाई जाती है उस दौर के राजाओं का मक़सद सिर्फ सत्ता पाना होता था उन्होंने सबूत दिया कि महाराणा सांगा ने बाबर को भारत पर हमले के लिए क्यों बुलाया था। इसीलिए कि बाबर के पास अच्छी फ़ौज थी, जो दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोधी का मुकाबला कर सकता था। वे कह रहे थे कि शिवाजी और महाराणा प्रताप की सेना में मुस्लिम सैनिक थे और औरंगज़ेब की सेना में हिन्दू सेनापति थे तो फिर उस वक़्त लोगों के बीच मज़हब कहां था! उनकी बात में दम था लिहाज़ा तालियां हासिल हुई और बहुत से लोगों की ग़लतफ़हमी दूर हुई। फ़ज़्लुल्लाह ने शांति, जिहाद और महिला अधिकार के मुद्दे पर रामायण और गीता के श्लोक सुनते हुए कहा कि इन मुद्दों पर सभी धर्म एक हैं लेकिन नफरत फैलाने वाले इनका ग़लत मतलब निकलते हैं।
उनके बाद अनिल त्रिवेदी ने कहा कि हम इंसान से नहीं मशीनों से दोस्ती करने लगे हैं, समानता के साथ आगे नहीं बढ़ रहे हैं जो विवाद की जड़ है। कुलपति नरेंद्र धाकड़ ने कहा कोई धर्म हिंसा के लिए नहीं कहता।मन में तो किसी के शांति नहीं है।गांव वाले सोचते हैं शहर की चकाचौंध देखता है।लेकिन शहर में सब व्यस्त हैं, किसी को फुर्सत नहीं,सुकून नहीं।संतुष्ट होना सीखेंगे तो मन को शांति, सुकून मिल जाएगा।उन्होंने कहा हम उर्दू में सिर्फ शेरो शायरी करते रहे,इंजीनिरिंग की किताब लिखते तो तस्वीर बदलती।
कई मामलों में हमारा देश पिछड़ा है और हम आपसी झगड़ों में ही उलझे हैं, इसकी वजह शिक्षा और समझ की कमी है।शिक्षा प्राप्त कर लें तो झगड़े नहीं होंगे।उन्होंने आंकड़े बताते हुए कहा कि हम चीन से पिछड़ते जा रहे हैं और आर्थिक गुलामी की तरफ बढ़ रहे हैं। ईस्ट इंडिया कम्पनी से बड़ा डर चीन से बना है। कुलपति धाकड़ ने कहा बड़ा सोचे और हम भाईचारे से भारत के अंग की तरह रहें।
प्रारम्भ में मौलाना अफ़रोज़ आलम साहब ने पैगम्बर ए इस्लाम के वो वाकिये सुनाएं जो बताते हैं कि इस्लाम में सभी धर्म के लोगों को सम्मान दिया गया है। आखरी में सवाल-जवाब भी हुए जिसमें हिन्दू-मुस्लिम सभी ने सवाल किए जिनके जवाब डॉक्टर फ़ज़्लुल्लाह ने दिए। सबसे आखिर में पैगम्बर ए इस्लाम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम के वंशज सैयद साजिद मियां ने भी दो लफ्ज़ कहे उन्होंने इतना मुख़्तसर भाषण दिया कि कोई परेशान नहीं हुआ, जबकि भाषण का सिलसिला दो ढाई घंटे तक चल चुका था।कार्यक्रम के समापन पर पालीवाल कैटरिंग के ज़ायकेदार शाकाहारी पकवान का सभी ने लुत्फ उठाया।देश की खुशहाली की दुआ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।जिसमें शहर के गणमान्यजन मौजूद थे।