हज़रत इमाम हुसैन के तरीकों को ज़िन्दगी में अपनाए

खबर नेशन /Khabar Nation

 

 

 

इंदौर। जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला की महफिलों का दौर मोहर्रम की सातवीं तारीख़ को भी जारी रहा। शोहदा का जिक्र सुन सबकी आंखें नम रही। शहर की अनेक मस्जिदों में कर्बला की दास्तान सुनी और सुनाई जा रही है। 

चन्दननगर स्थित नूरानी मोहम्मदी मस्जिद में दास्ताने कर्बला व ताजदारे खत्मे नबुव्वत कांफ्रेंस में बरेली के मौलाना मोहम्मद हनीफ खां साहब की ख़ास तक़रीर हुई। उन्होंने कहा हज़रत इमाम हुसैन से सच्ची मोहब्बत ये है कि हम उनके तरीक़ों को ज़िन्दगी में अपनाएं। मुफ़्ती-ए-शहर सैयद साबिर अली मिस्बाही साहब ने सादगी भरे लहजे में फरमाया कि कर्बला में इमाम हुसैन शहीद तो हो गए, लेकिन दुनिया को सब्रो-इंसानियत का पैगाम दे गए। और यह बता गए की दीन-ए-इस्लाम सब्र व शहादत से फैला। इसके लिए कुर्बानियां दी गईं। उन्होंने कहा हज़रत इमाम हुसैन की शहादत से हमें सीखने की ज़रूरत है। मौलाना अज़हरुद्दीन अशरफी ने कर्बला की दास्तान पर रोशनी डाली। हाफिज सिकन्दर रज़वी ने भी तक़रीर की। हाफिज सैयद इख़्तियार अली भी ख़ास तौर पर मौजूद थे। जलसे की शुरुआत हाफिज अल्ताफ हुसैन ने तिलावते क़ुरआन से की। हाफिज अंसार रहमानी ने निज़ामत की ज़िम्मेदारी संभाली।

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