सोमवार शिव दर्शन का तात्विक क्षणवार

खबर नेशन / Khabar Nation

श्रावण-शिव और सोमवार

श्रावण (श्रावण)चांद्र मास का नामकरण श्रवण नक्षत्र में पूर्णिमा होने से,यह (चांद्र मास) श्रावण मास कहा जाता है।

श्रावण मास में सूर्य,कर्क राशि, अमावस्या,मकर राशि,पूर्णिमा तथा सोमवार और शिवपूजन या रुद्राभिषेक का महत्व है।

श्रावण (चांद्रमास) की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को सूर्य चंद्र-कर्क राशि में समान अंशों में एक साथ होते हैं, तभी अमावस्या (पर्व)होता है। श्रावण मास में सूर्य कर्क राशि में होते हैं,कर्क राशि का स्वामी चंद्र ग्रह है या कर्क राशि चंद्र ग्रह की स्वराशि है।

श्रावण मास शिवलिंग अर्चनए रुद्राभिषेक,सोमवार व्रत के लिए कल्याणकारी माना गया है।

सूर्य अग्नि तत्व और चन्द्र सोम (जल) तत्वाधिपति हैं। पुराणों में ज्योतिर्लिंग का विशिष्ट लिंगों में परिगणन है।ज्योतिर्लिंग समस्त पद है।उसका विग्रह “ज्योतिश्चत लिङ्गम च” इस प्रकार है। अर्थ है- ज्योति रूप लिंग। इनमें ज्योति का स्वरूप प्रसिद्ध है।

ज्योतिर्लिंग भगवान सूर्य हैं, सूर्य भिन्न-भिन्न 12(बारह) प्रकार की ज्योतियो में समाविष्ट हैं। यह बारह (12) प्रकार की ज्योति नक्षत्र मंडल की बारह(12) राशियां हैं। जो कि मेष,वृष,मिथुन,कर्क,सिंह,कन्या, तुला,वृश्चिक,धनु,मकर,कुंभ,मीन नाम से जानी जाती हैं।

यह (12) बारह राशियां आकाशीय नक्षत्र मंडल के क्रांति वृत्त में दिखाई देती हैं। इन 12 राशियों में सूर्य गमन से 12 महीनों का 1 वर्ष होता है। सूर्य प्रत्येक एक राशि में 1 माह रहता है,अतः जब सूर्य कर्क राशि में होता है,तब श्रावण माह होता है| यह सूर्य की निरयन गति है। जबकि चंद्रग्रह एक माह में अर्थात प्रत्येक मास में बारह राशियों का भोग कर लेता है।इस प्रकार सूर्य और चंद्र ग्रह जब कर्क राशि में एक साथ होते हैं| तब श्रावण चांद्रमास होता है।

उज्जयनि से ही कर्क राशि 23.5° अक्षांश पर होकर निकली है।

यहाँ स्मरण रहे-कर्क राशि उज्जयनि(अवंतिका)श्रावण मास, महाकाल ज्योतिर्लिंग तथा सूर्य और चंद्र का प्रत्यक्ष संबंध है। यह सनातन धर्म संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं में प्राथमिक कालजयी और शाश्वत विशेषता है। इस प्रकार श्रावण मास सोमतत्व (सोमवार) ज्योतिर्लिंग अर्चन,पार्थिव पूजन,रुद्राभिषेक और उज्जयनि स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग,सनातन धर्म का विशुद्ध वैज्ञानिक दर्शन (पक्ष) है। यह ज्योतिर्लिंग रुद्र का लिंग है, कारण कि सौर उत्ताप रौद्र है।श्रुति के अनुसार परमात्मा के दो रूप हैं घोर और शिव।उसका घोर रूप अग्नि है। और शिव रूप सोम है। उसके घोर भाव के दर्शन अग्नियों में और शिवभाव के दर्शन सोम में होते हैं।

शास्त्रानुसार रविवार के स्वामी शिव और सोमवार की स्वामिनी माता पार्वती(क्रिया शक्ति)हैं किंतु सोमवार को शिवार्चन,शिव पूजन, सोमव्रत या श्रावण मास में रुद्राभिषेक,लिंगार्चन प्रसिद्ध हैं, इसलिए कि जीवन प्रदाता सोमतत्व या सोमवार शिव दर्शन का तात्विक क्षणवार है। उष्णकाल की उष्णतम वायु में रौद्रभाव प्रत्यक्ष है। वर्षा काल (श्रावण मास) की आर्द्रता में शिव भाव प्रत्यक्ष है। जैसे एक ही वायु के अवस्था भेद से दो रूप हैं. अतः जो रूद्र लिंग है वह शिवलिंग भी है। जो शिवलिंग है, वह रूद्र लिंग भी है।

सूर्य में पचपन(55 रूद्र)- वेद वेत्ताओं का मत है कि ज्योतिर्लिंग सूर्य पचपन(55) रूद्र प्राणों की समिष्टि है। इसमें विश्व के सब पदार्थ प्रतिष्ठित है।सूर्य-चंद्र और अग्नि ये तीनों ज्योतियां उस महेश्वर के तीनो नेत्र हैं।यह सूर्य भगवान रुद्रावतार हैं। भगवान सूर्य में 55(पचपन) रूद्र समाश्रित हैं. अतः वे एकलिंग हैं। यह अत्यंत तेजोमय है। भैरव है। यह चारों ओर जल से अभिषिक्त होकर यह रूद्र ही (साम्ब)सजल बनकर शांत होने से स्वरूप में परिणत हो जाता है। ज्योतिःष शास्त्र में सूर्य काल नियामक (काल चक्र प्रवर्तनों महाकाल प्रतापनः) महान नक्षत्र और सभी ग्रहों के राजा ग्रह हैं। सूर्य आत्मा और परमात्मा दोनों के अधिष्ठाता हैं। अतः जातक का आत्मबल और परमात्म भाव जन्म लग्न कुंडली में सूर्य के भावगत राशिस्थ से देखा जाता है। उनके जगत पिता होने के कारण पितृसुख एवं राज वैभव भी सूर्य से देखा जाता है।

आनंद और क्रिया के अधिष्ठान चंद्र है। मन के अधिपति भी चंद्र है। ज्ञान के अधिष्ठान सूर्य हैं।उक्त विवरणों के आधार से श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग, ज्योतिर्लिंग अभिषेक,रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ और रूद्र मंत्र के रुद्राभिषेक,सोमवार व्रत,उज्जयनि कर्क राशि स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग दर्शन, जलाभिषेक,आत्मा को शांति, चित्त(मन) को प्रसन्नता,प्रसाद प्रदान करते हुए,आत्मबोध का हेतु है। श्रावण मास में- रुद्राभिषेक,शिव पूजन तथा सोमवार व्रत से

मेष- राशि वालों को हृदय सुख,माता का आशीर्वाद तथा गृह सुख प्राप्त होता है।

वृष- राशि वालों को भ्रातृसुख और पराक्रम वृद्धि लाभ होता है।

मिथुन- राशि वालों को स्थाई संपत्ति,कुटुंब सुख,देव दर्शन तथा धन कोष वृद्धि लाभ होता है।

कर्क- राशि वालों को देह सुंदरता,सुख,यश,कीर्ति लाभ होता है।

सिंह- राशि वालों को विशेष धर्म कर्म व्यय दान, विदेश संबंध व मोक्षलाभ होता है।

कन्या- राशि वालों को उच्च पद प्राप्ति,वरिष्ठ अधिकारियों से लाभ व आय स्त्रोत लाभ होता है।

तुला- राशि वालों को राज योग सुख,पैतृक अधिकारों की प्राप्ति लाभ होता है।

वृश्चिक- राशि वालों को प्रारब्ध लाभ,बड़ी हुकूमत और धर्म गति लाभ होता है।

धनु- राशि वालों को गुप्त धन,गुप्त सूचना,तीर्थ सेवन का लाभ होता है।

मकर- राशि वालों को स्त्रीसुख लाभ व दैनिक सेवकों से लाभ प्राप्त होता है।

कुंभ- राशि वालों को योग, लाभ संघर्ष में  विजय,रोग-ऋण मुक्ति लाभ होता है।

मीन- राशि वालों को श्रावणमास शिवपूजन से संतान लाभ सुख,ज्ञान बुद्धि वृद्धि- उपाधि प्राप्त लाभ होता है।

 

अन्वेषक लेखक

पँ. कैलाशपति नायक

मोबाइल. 94251-32348 अशोकनगर (मप्र)

 

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