राजनीति को सेवानीति में बदलते राजेन्द्र शुक्ल

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कहा जाता है, व्यक्ति जैसा सोचता है, धीरे-धीरे वह वैसा ही हो जाता है। सामाजिक जीवन में सक्रिय कार्यकर्ता का व्यक्तित्व कार्य और व्यवहार से बनता है। सेवा-संकल्प का समर्पित भाव, चुनौतियों की जिद और जूनून के साथ सामना करने का जज्बा व्यक्तित्व का ऐसा पहलू है, जो राजनीति को सेवानीति में बदल देता है। व्यक्ति अगर राजनेता हो तो प्रशासक, संगठक और कार्यकर्ता की भूमिकाओं से उसका व्यक्तित्व बनता है। राजेन्द्र शुक्ल ने विचारों की व्यापकता व्यक्तित्व की विशालता, व्यवहार की सहजता और विशिष्ट संवाद क्षमता के अद्धुत संयोग से ऐसे ही व्यक्तित्व का निर्माण किया है, जो नफरत करने वालों के दिल में प्यार भर देता है। वे समय के साथ जनहित कार्यों को समर्पित लोक-हितैषी और अच्छी छवि के राजनेता के रूप में उभरे हैं।

 राजेन्द्र शुक्ल के व्यक्तित्व का सशक्त पहलू व्यापक धारा है। यह धारा व्यवहारिकता और आध्यात्मिकता के अनूठे संयोजन से बनी है। सहज, सरल, सुलभ और निश्छलता के चलते उनकी सफलताओं, करिश्माई व्यक्तित्व और सोच ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। जनता ही उनकी भगवान है और उसी की सेवा में उन्हें नारायण के दर्शन होते हैं। उनके व्यक्तित्व में पारिवारिक संस्कार साफ-साफ दिखाई देते हैं। सत्तारूपी काजल की कोठरी में भी बेदाग श्री शुक्ल अपनी प्रशासनिक कार्य-शैली भी वे इस तरह का संतुलन बनाकर रखते हैं। विचारों की व्यापकता उनकी रुचि-नीति में भी दिखती है।

 शुक्ल के दरवाजे से जरूरतमंद और आम आदमी बिना अपनी समस्या के निदान के न जाने पाये, इसी संकल्प और नेक नीयत ने उन्हें विनम्रता को और मधुर वाणी का वह गुण दिया है जो हम अपने आदर्शों में तलाश करते हैं। उनकी सादगी उन्हें प्रदेश की राजनीति में अलग बनाती है। वे असाधारण व्यक्तित्व वाले साधारण जनसेवक हैं। उनके पास मानवीय संवेदनाओं, अनुभूतियों के उदार गुणों से भरा दिल है, जो हर पल पीड़ित मानवता की सेवा के लिये धड़कता है। उनकी सफलताओं का आधार एक अलग पहचान बना रहा है।

एक योगी की तरह हर आम-खास की बात, समस्या सुनना, मनन करना, तार्किकता की कसौटी पर कसना और तत्काल निर्णय कर समस्या के समाधान का निर्देश देना, उनका ऐसा गुण है, जिससे आम 'जन' के 'मन' से उनका एक आत्मीय रिश्ता बन जाता है। मानवीय संवेदनाओं अनुउद्वार गणों से भरा दिल है जो हर पल पीड़ित मानवता की सेवा के धड़कता है। वे कार्यों पर जितनी चौकस निगाह उतनी उनको चिंता है कि दरवाजे पर आए गंभीर रोग से पीड़ित और हर दुखियारे की मदद कर उसका दुख-दर्द दूर किया। उन्होंने कभी छवि निर्माण के प्रयास नहीं किये। उनकी सदइच्छाओं ने उनकी छवि को इतना पुख्ता कर दिया है कि लाख कोशिशें उसे धुँधला कर पाने में अक्षम हैं।या ने अपने क्षेत्र 

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