ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों को मिले पक्के मकान

भोपाल। मजदूरी कर परिवार का गुजारा करने वाले व्यक्ति के लिये खुद के पक्का मकान का सपना दिवा-स्वप्न से कम नहीं होता। मध्यप्रदेश में ऐसे श्रमिकों का अपने पक्के मकान का सपना प्रधानमंत्री आवास योजना से हकीकत में बदल रहा हैं।

ऐसी ही कहानी हैं झाबुआ जिले के पेटलावद ब्लॉक के गाँव बैकल्दा के रहने वाले श्रमिक सोहन की। इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से वर्ष 2016-17 में एक लाख 50 हजार रुपये की मंजूरी मिली। सोहन ने मजदूरी कर कुछ राशि बचाई। फिर इस राशि और मिले अनुदान की राशि से पक्का मकान बना लिया हैं।

इसी जिले के पेटलावद ब्लॉक के ग्राम रामपुरिया की मन्नु अपने पति के साथ मजदूरी कर जैसे-तैसे परिवार का भरण-पोषण कर रही थी। पक्के मकान की अभिलाषा लिये परिवार ने कुछ राशि बचाई भी, पर उससे पक्के मकान का सपना पूरा होता नहीं दिखा। मन्नु ने सरपंच की सलाह पर पक्का मकान पाने के लिये इस योजना में आवेदन कर दिया। कुछ समय बाद इसे एक लाख 50 हजार रूपये की वित्तीय सहायता मिल गई। उसने पहले से बचा रखी कुछ राशि मिलाकर पक्का मकान बना लिया हैं। अब यह महिला अपने परिवार के साथ सीमेंट-कांक्रीट के पक्के भवन में रह रही हैं। झाबुआ जिले के ही थांदला विकासखण्ड के ग्राम काकनवानी के सकरा वेस्ता को वर्ष 2016-17 में पक्का आवास बनाने की स्वीकृति मिली। सकरा ने शासन से मिले अनुदान और कुछ राशि अपने पास से मिलाकर अपना पक्का मकान बना लिया हैं। अब वह अपने परिवार के साथ सीमेंट-कांक्रीट के पक्के मकान में रहता हैं।

अनूपपुर जिले की ग्राम पंचायत पसला की रहने वाली निसारा बाई की कहानी भी कुछ इसी तरह की हैं। इन्होंने शादी के पहले यह सपने संजाए थे कि ससुराल ऐसी मिले, जहाँ पक्का मकान हो। परंतु सोच के उल्टे ही उसकी ससुराल में रोजी-रोटी कमाने के लाले पड़ रहे थे। पक्का मकान का सपना तो बहुत दूर की बात थी, हालांकि निसारा बाई ने मजदूरी में से कुछ राशि धीरे-धीरे बचाई भी पर इससे पक्का मकान बनना संभव नहीं था। इस महिला ने ग्राम में कच्चे मकान की जगह बने पक्के मकान बनते देखकर ग्राम पंचायत कार्यालय जाकर प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में अपना नाम जुड़वाया। कुछ समय बाद निसारा बाई को एक लाख 40 हजार रुपये आवास निर्माण के साथ ही शौचालय के लिये 12 हजार रुपये मिल गये। निसारा बाई एवं उसके परिवार ने पक्के मकान के लिये मजदूरी भी की, जिससे मनरेगा से काम के बदले 18 हजार रुपये की राशि मिल गई। अब निसारा बाई का परिवार खुद के पक्के मकान में रहता हैं।

बड़वानी जिले के अंजड़ में एक हजार गरीबों को इस योजना में शानदार आशियाना मिला हैं। नगर पंचायत अंजड़ में पिछले साल पहले चरण में 500 और दूसरे चरण में 500 गरीब हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किये गये। प्रथम चरण के तकरीबन 95 फीसदी आवास निर्मित भी हो चुके हैं।

नगर परिषद अंजड़ के वार्ड क्रमांक-1 के रहवासी कमल, शोभाराम एवं कालू सेमला ऐसे नाम हैं, जो बहुत जल्द पक्के मकान में रहने लगे हैं। इन हितग्राहियों ने बताया कि नगर परिषद के अधिकारियों ने आकर आवेदन तैयार करवाकर बताया था कि चार चरणों में स्वीकृत राशि मिलेगी। तब उन्हें यकीन नहीं हुआ। जब उनके खाते में पहली किश्त आई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। धीरे-धीरे अंतिम किश्त भी मिल गई। इस तरह अब इन सबका पक्का मकान बन गया हैं।

आगर-मालवा जिला आगर मालवा ग्राम घोसली पोष्ट मथुराखेड़ी निवासी प्रेमसिंह को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में पक्का मकान बनाने के लिये एक लाख 50 हजार रुपये की राशि मंजूर की गई थी। इस राशि में कुछ अपनी जमा पूँजी को मिलाकर अपना बड़ा-सा पक्का मकान का निर्माण करवा रहे हैं। हितग्राही ने आवास के साथ ही शौचालय का निर्माण भी करवाया हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)

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