यूपीए सरकार को नियंत्रक लेखा महापरीक्षक ने आईना दिखाया
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और सांसद मनोहर ऊंटवाल ने कहा कि कांग्रेस दोहरा मापदंड अपना रही है। एक ओर तो भ्रष्टाचार और घोटालों में जांच, कड़ी कार्यवाही न होने का आरोप लगाकर अपने को बेगुनाह साबित करती है। वही दूसरी ओर जांच एजेंसियों द्वारा घोटालों और भ्रष्टाचार की जांच होने पर इसे राजनैतिक बदले की कार्यवाही और बदले ही भावना से की गयी कार्यवाही बताती है।
उन्होंने कहा कि 16 वी लोकसभा चुनाव में जब 16 मई 2014 मतगणना के नतीजे घोषित किए जा रहे थे तत्कालीन यूपीए सरकार के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम कुछ चुनिंदा कंपनियां जिनमें गीतांजलि और फायर स्टार शामिल थी। उन्हें अवैध तरीके से लाभ पहुंचाने के आदेश पारित कर रहे थे। इस घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए नियंत्रक और लेखा महापरीक्षक ने इस कृत्य को लोकधन की लूट बताया। जांच एजेंसियो ने जब जांच आरंभ की तो पता चला कि यूपीए सरकार ने चालू खाते का घाटा पूरा करने के उद्देश्य से सोना आयात करने की योजना को मंजूरी दी। इसमें प्रावधान किया गया कि 100 प्रतिशत सोना आयात में 20 प्रतिशत सोना आभूषण बनाकर निर्यात किया जाए। इसे अस्सी बीस स्वर्ण योजना नाम दिया गया लेकिन इस प्रावधान का आभूषण बनाने वाली कंपनियों ने पालन नहीं किया। जब नियंत्रक लेखा महापरीक्षक ने पाया कि बिना 20 प्रतिशत आभूषण के निर्यात के कंपनियां योजना का लाभ उठाकर माला माल हो रही है। जांच के आदेश दिए गए। इस अनियमितता के लिए की गयी जांच को बदले की कार्यवाही बताना अनुचित है। कांग्रेस यदि अपेक्षा करती है कि उसके आरोप लगाने, कार्यवाही बदले की भावना से किए जाने के आरोप से जांच रोक दी जाए तो यह कांग्रेस की मृगतृष्णा है।
मनोहर ऊंटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले ही दिन अपनी प्रतिबद्धता उजागर कर दी थी कि न खायेंगे न खाने देंगे। भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता का संकल्प पूरा किया जा रहा है। ऐसे में यदि वित्त मंत्री के रूप में पी. चिदंबरम भी जांच के लपेटे में आते है तो इस पर कांग्रेस का ऐतराज बेवजह होगा। कांग्रेस को जांच का इंतजार करना चाहिए। न्यायालय पर यह बात छोड़ देना जाना चाहिए। (खबरनेशन / Khabarnation)