सदन से भागकर राहुल गांधी अब बोलने का समय मांगकर जनता को भ्रमित कर रहें हैं

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व सांसद आलोक संजर ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को संसद के बाहर नहीं अन्दर बोलने की जरूरत हैं लेकिन राहुल गांधी संसद में बहस से भाग न लेकर बहस से भागने में ज्यादा विश्वास करते हैं। राहुल गांधी का कहना कि उन्हें रफाल डील और नीरव मोदी के मुद्दे पर 15 मिनट बोलने दिया जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग खड़े होंगे, यह कथन राहुल गांधी के अपरिपक्वता को जाहिर करता हैं। हकीकत यह हैं कि दोनों मुद्दों को राहुल गांधी ने निजी तौर पर संसद में उठाने की कभी कोशिश ही नहीं की। उन्होंने कहा कि गरजने वाले बरसते नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि असल में किसी भी सांसद को संसद में कोई भी मुद्दा उठाना होता हैं तो उसके लिए लोकसभा सचिवालय को नोटिस देना होता हैं। अमूमन इस पर शून्यकाल में बोलने का मौका मिलता हैं। जबकि रफाल डील विवाद के बाद राहुल गांधी ने स्पेशल मेंशन के तहत इस मुद्दे पर बोलने के लिए कभी कोई नोटिस ही नहीं दिया। संजर ने कहा कि 25 जनवरी 2016 को रफाल डील के बाद राहुल को संसद में तीन बार बोलने का मौका मिला परंतु उन्होंने रफाल सौदे का जिक्र तक नहीं किया। यहां तक कि राहुल गांधी ने पिछले चार साल में एक प्रश्न तक नहीं पूछा और अब रफाल सौदे पर 15 मिनट बोलने के लिए समय मांगकर सिर्फ झूठी राजनीति कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहें हैं।

संजर ने कहा कि सर्वविदित हैं कि राहुल गांधी के कारण यूपीए के 10 साल में मनमोहन सिंह को मौन पीएम कहा जाता रहा हैं। राहुल गांधी को चाहिए कि वह गंभीर विपक्ष के तौर पर अपनी बातें रखें लेकिन कभी वे अपने बोलने पर भूकंप आने का अंदेशा करते हैं तो कभी बोलने के लिए 15 मिनट मांगते हैं। कांग्रेस को तय करना चाहिए कि राहुल गांधी को बोलने की जरूरत हैं या नहीं। (खबरनेशन)
 

 

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