माँ ने मजदूरी कर चार बेटियों को बनाया नेशनल प्लेयर

ज्योति चौहान ने खेले 10 नेशनल गेम : लगाये 256 गोल
 
भोपाल।
पिता के असामायिक निधन के बाद माँ ने मजदूरी कर अपनी चार बेटियों को राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया हैं। ऐसा बहुत ही कम होता हैं कि चारों बहनें एक साथ एक जैसी सफलता हासिल करें, लेकिन धार जिले की सरदारपुर तहसील की रहने वाली रेखा बाई की बेटियों ने यह कारनामा कर दिखाया हैं। 

घर के पास ग्राउण्ड पर लड़कों को फुटबाल खेलते और कसरत करते हुए देखती बहनों में दूसरे नम्बर की ज्योति ने 12 वर्ष की उम्र में लड़कों के साथ फुटबाल खेलना शुरू कर दिया था। वह उस समय 6वीं कक्षा में पढ़ती थी। ज्योति को खेलता देख बड़ी बहन आरती दीपिका और पायल भी फुटबाल खेलने लगीं। आरती, दीपिका और पायल 10वीं कक्षा में तथा ज्योति 11वीं कक्षा की छात्रा हैं। इन सब में सबसे सशक्त दावेदारी ज्योति की हैं।

ज्योति अभी तक 10 नेशनल गेम्स खेल चुकी हैं। वर्ष- 2011-12 में ज्योति ने इम्फाल (मनीपुर) में, 2012-13 में मुम्बई (महाराष्ट्र), 2013-14 में पुणे (महाराष्ट्र), 2014-15 में इम्फाल (मनीपुर) 2016-17 में मेंढ़क (तेंलगाना) मध्यप्रदेश की स्कूल शिक्षा टीम का प्रतिनिधित्व किया हैं। ज्योति ने आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन (AIFF) द्वारा गोआ में आयोजित फुटबाल ओपन में भागीदारी दर्ज कराई हैं। सी.ए.पी. एफ. यू-19 फुटबाल टेलेंट हन्ट टूर्नामेंट में अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई हैं। मिनिस्ट्री ऑफ यूथ एफेयर्स एण्ड र्स्पोट्स द्वारा वर्ष 2013-14 में रॉची में आयोजित 6th स्वामी विवेकानन्द पायका नेशनल लेविल रुरल कम्पटिशन 2013-14 और 'सुब्रतो कप नेशनल फुटबाल टूर्नामेंट' में भी भाग ले चुकी हैं।

ज्योति के कोच शैलेन्द्रपाल का कहना हैं कि ज्योति में असिमित प्रतिभा हैं, बस आवश्यकता उसे प्रोत्साहन और आर्थिक सहयोग की हैं। ज्योति का चयन भारत की आस्ट्रेलिया जाने वाली गर्ल्स टीम में गत वर्ष हो गया था लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वह नहीं जा सकी। अभी हाल में ही ज्योति मुम्बई में नेशनल फुटबाल कैम्प में भाग लेकर लौटी हैं। ज्योति अभी तक इन प्रतिस्पर्धाओं में 256 से अधिक गोल कर चुकी हैं। अब ज्योति का सपना देश की टीम में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का हैं।

ज्योति की अन्य तीन बहनें भी कम नहीं हैं। बड़ी आरती 3 नेशनल, छोटी दीपिका 8 नेशनल और सबसे छोटी पायल जूनियर वर्ग में चार नेशनल प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)

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