वन उत्पादों की भी समर्थन मूल्य पर खरीदी से वनवासियों के श्रम का उचित मूल्य मिलेगा

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गजेन्द्र पटेल ने कहा कि वन उत्पाद संग्रहण वनवासियों की आजीविका का प्रमुख साधन हैं। तेन्दुपत्ता, महुआ फूल गुली, अचार की गुठली जैसे मौसमी उत्पाद संग्रहण करना जनजातियों की आय का साधन हैं। इन उत्पादों के लिए उचित विपणन व्यवस्था नहीं हो पाने से वनवासी आर्थिक शोषण का शिकार बनते रहे हैं। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने वन उत्पादों का समुचित मूल्य सुनिश्चित कराने के लिए उत्पादों के संग्रहण मूल्य में वृद्धि करने के साथ आश्वस्त किया हैं कि यदि संग्राहकों को उचित दाम नहीं मिलता तो राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उत्पाद खरीदेगी। वनवासियों को आर्थिक शोषण का शिकार नहीं बनने दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि तेन्दुपत्ता संग्रहण की दरें 1250 रूपए से 2000 रूपए मानक बोरा करके प्रोत्साहन दिया हैं। इसी तरह महुआ फूल एवं गुल्ली की संग्रहण दर 14 रूपए से बढ़ाकर 30 रूपए किलो घोषित कर दी गयी हैं। अचार गुठली 100 रूपए किलो से कम नहीं बिकने दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वनवासी क्षेत्रों में वन उत्पादों के विपणन की व्यवस्था में राज्य सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से आदिवासी संग्राहकों के दिन फिर कर अच्छे दिन आ गए हैं।

पटेल ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम धूप, प्यास में वन उत्पादों का संग्रहण करने वालों को राज्य सरकार ने चरण पादुका, पानी की कुप्पी भेंट करके मानवीय सरोकार का निर्वाह कर उनके दिन बदलने का बीड़ा उठाया हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)
 

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