परम्परागत खेती की तुलना में उद्यानिकी से दस गुना तक ज्यादा फायदा
भोपाल। बालाघाट, शहडोल और झाबुआ जिले के किसानों ने धान, गेहूँ और चना आदि की परम्परागत खेती के स्थान पर करेला, टमाटर आदि उद्यानिकी फसलें लेकर एक साल में दस गुना ज्यादा आय प्राप्त की हैं। ये किसान अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन रहे हैं।
बालाघाट जिले के लांजी विकासखण्ड के बेलेगाँव के कृषक मेहतर लाल अपने खेत में धान की फसल के बाद टमाटर और करेला की फसल पैदा करते हैं। मेहतर लाल एक साल में तीन लाख रूपये तक का करेला और टमाटर आदि सब्जियों की फसल बेचते हैं। पिछले पाँच वर्षो में इन फसलों ने उन्हें सम्पन्न किसान बना दिया हे। अब वह धान की फसल इतनी ही लेते हैं, जितनी घर खर्च के लिए जरूरी होती हैं। मेहतर लाल टमाटर को अधिक दिनों तक रखकर उसके सही दाम की प्रतीक्षा के लिए अपने घर में कोल्ड स्टोरेज बनाने की और खाद्य प्रसंस्करण लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना हैं कि वे करेला और टमाटर के आधुनिक बीज का उपयोग करते हैं और ड्रिप सिंचाई तकनीक को अपनाते हैं।
शहडोल जिले के सोहागपुर विकासखण्ड के भमरहा गाँव के किसान लालबाबू सिंह सेंगर बरबटी, गिलकी और गोभी की पैदावार ले रहे हैं। तुलना में 2 गुना से ज्यादा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। ड्रिप सिंचाई पद्धति और मल्चिंग वर्मी कम्पोस्ट इकाइ और पॉली हाउस लगाने के लिए वे योजना बना रहे हैं।
झाबुआ जिले के थांदला ब्लॉक के परवलिया गाँव के किसान अरूण ने परम्परागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर 10 गुना तक लाभ कमाने का रिकार्ड बनाया हैं। अरूण ने बताया कि सोयाबीन, उड़द और ज्वार आदि फसलों से उन्हें 20 से 25 हजार रूपये सालाना की आय होती थी। जबसे उन्होंने टमाटर, मिर्च और प्याज आदि की उद्यानिकी फसलें लेना शुरू किया हैं, तब से वह अपनी 2 हेक्टेयर की खेती से सालाना दो से तीन लाख रूपये की आय प्राप्त कर रहे हैं, जो परम्परागत खेती की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक हैं। खेती में ड्रिप सिंचाई तकनीक का उपयोग करते हैं। अरूण बताते हैं कि उनका पक्का मकान हैं और उनके पास आवागमन का बढ़िया साधन भी हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)