कांग्रेस को लोकतंत्र के बजाए स्वार्थ की चिंता

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को भारतीय लोकतंत्र और उसके भविष्य की नहीं सिर्फ कांग्रेस के संकीर्ण लाभ की चिंता है। सुरजेवाला एक राष्ट्र एक चुनाव को गैर संवैधानिक बताकर स्वयं हास्य का पात्र बन रहे है। कोठारी ने कहा कि 1952 से 1967तक एक साथ चुनाव हुए तब प्रजातांत्रिक अधिकारों पर अतिक्रमण नहीं हुआ क्योंकि ऐसा करना कांग्रेस के हित में था। जैसे ही राज्यों में गैर कांग्रेसी दलों के साथ स्पर्धा शुरू हुई और कांग्रेस का कद बौना होता गया। एक साथ चुनाव की प्रक्रिया अलोकतांत्रिक दृष्टिगोचर होने लगी।
 

उन्होंने कहा कि विधि आयोग सहित संसदीय समिति ने अनुशंसा करते हुए कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव से लोकतंत्र परिपक्व होगा। शासकीय धन और समय की बर्बादी रूकेगी। इसके लिए राजनैतिक दलों को संकीर्ण स्वार्थ त्याग कर सहमति बनाने की आवश्यकता और अपेक्षा है। सहमति बनाने पर संविधान संशोधन करना भी मुश्किल नहीं होगा।
 

कोठारी ने कहा कि 1952 से 1967 तक निर्वाचन आयोग का स्वरूप इतना विस्तृत नहीं था। संसाधन और प्रौद्योगिकी का विकास नहीं हुआ था जितना आज हो चुका है। ऐसे में यदि साहस और दूरदर्शिता पूर्वक पहल की जाती है तो यह भारतीय लोकतंत्र के सशक्तिकरण में मील स्तंभ साबित होगा। कांग्रेस अपनी पराजय और भाजपा के विस्तार से भयाक्रांत है और भयभीत है कि इससे भाजपा छा जायेगी। जनादेश देना जनता का काम है। लेकिन कांग्रेस को न तो लोकतंत्र पर भरोसा है और न भविष्य के प्रति निश्चित है, इसलिए इसे षडयंत्र बताकर कांग्रेस अपनी कुंठा व्यक्त कर रही है।

(खबरनेशन / Khabarnation)
 

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