युवा वर्ग को स्वाबलम्बी बना रही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना
भोपाल। प्रदेश में युवा वर्ग को स्वयं का सम्मानजनक रोजगार स्थापित कर स्वावलम्बी बनाने में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना सहायक बन गई हैं। अब युवा-वर्ग इस योजनाओं में लोन लेकर अपने बलबूते पर आत्मनिर्भर हो रहे हैं। गुना जिला मुख्यालय के हनी सोनी की कहानी कुछ अलग तरह की हैं। हनी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। यह पहले नोएडा में प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर की नौकरी करते थे। अपने माता-पिता की वृद्ध अवस्था को देखते हुए नौकरी की परवाह न करते हुए गुना वापस तो आ गये परन्तु उनके सामने रोजगार की समस्या तो थी ही।
मित्रों की सलाह पर हनी सोनी ने ग्रामोद्योग हाथकरघा विभाग में मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर दिया। इन्हें कैरी बेग प्रिटिंग के कारोबार के लिए नवम्बर 2017 में 6 लाख रूपये का ऋण और इस पर 2 लाख रूपये का अनुदान मिला। बस फिर क्या था, उनका कैरी बैग प्रिटिंग का कारोबार चल पड़ा।
हनी के बनाये कैरी बैग गुना जिला सहित अशोकनगर, शिवपुरी और राजगढ़ जिले तक जाने लगे हैं। हनी अपनी सफलता का राज बताते हुए कहते हैं कि उनके कैरी बेग सस्ते और क्वालिटी में अच्छे होने के कारण इनकी माँग बढ़ गई हैं। इस कारोबार में अच्छी आमदनी के चलते इन्होंने अब तीन कर्मचारियों को भी काम पर लगा लिया हैं। सामाजिक उत्तरदायित्वों की भागीदारी में हनी ने नई पीढ़ी के लिए मिसाल कायम की हैं। हनी का कहना हैं कि सरकार की योजना से उन्हें आजीविका का सहारा मिला।
राजगढ़ जिले के ग्राम सुठालिया के मोती सिंह लोधी स्नातक हैं। नौकरी नहीं मिलने पर अपने पिता के साथ अनाज के व्यापार में हाथ बटाँते थे। आधुनिक टेक्नोलॉजी के चलते उन्होंने मोबाईल का व्यवसाय शुरू करना तय किया। इसके लिए इन्होंने इंदौर में व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर छोटी पूंजी से दुकान तो खोल ली, परन्तु व्यवसाय में वृ्द्धि के लिए और पूंजी की जरूरत थी। इसके लिए इन्होंने स्थानीय बैंक से सम्पर्क किया। इस दौरान कौशल उन्नयन के लिए उद्यमिता विकास प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया। मोती सिंह की रूचि और लगन को देखते हुए बैंक से इन्हें जुलाई 2017 में 5 लाख रूपये का लोन और इ
स पर 1 लाख 50 रूपये का अनुदान भी दिया। मोती सिंह अपने व्यवसाय से अब 25 हजार रूपये महीना आसानी से कमा रहे हैं।
इंदौर के रूस्तम बगीचा निवासी रंजीता पति-पत्नि कुल मिलाकर 9 हजार रूपये ही कमा पाते थे। एक दिन रंजीता अखबार में मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना का विज्ञापन पढ़ा, तो पति के साथ अखबार लेकर जिला अन्त्यावसायी सहकारी विकास समिति के कार्यालय में पहुँच गई। उसे पता चला कि अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार व्यक्तियों को लोन
मिलता हैं, तो लोन के लिए आवेदन भर दिया। जब इनका प्रकरण फूटी कोठी बैंक पहुँचा, तो बैंक से एक दिन बुलावा आया। कुछ दिनों बाद रंजीता को 5 लाख रूपये का लोन मंजूर हो गया। इसमें 1.50 लाख का अनुदान भी मिला। रंजीता को इस व्यवसाय में किश्त देने के बाद 20 से 25 हजार महीना आसानी से कमा रहे हैं।
छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम बीसापुर के रहवासी ब्रजेश मोहबे को अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित छिन्दवाड़ा के जरिए सिंडीकेंट बैंक से कृषि यंत्र थ्रेशर के लिए 2 लाख रूपये के ऋण मंजूर हुआ। ब्रजेश को कृषि यंत्र व्यवसाय से उसके आर्थिक हालात मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना ने ही बदले हैं। ब्रजेश मोहबे का यह धंधा खूब चल रहा हैं। अब वे बैंक की किश्त जमा करने के बाद 2 लाख रूपये सालाना आसानी से कमा रहे हैं।
(खबरनेशन / Khabarnation)