धान प्रधान बालाघाट जिले में केले की खेती बनी अप्रत्याशित लाभ का जरिया
भोपाल। बालाघाट जिले में किसान परम्परागत रूप से धान की खेती करते हैं। धान की खेती में अन्य फसलों की तुलना में लागत अधिक आती है और मुनाफा कम ही होता है। इसलिये किसान देवेन्द्र नगपुरे ने धान की खेती को छोड़ कर नगदी फसल केले की खेती को अपना लिया है। एक साल में ही देवेन्द्र ने केले की फसल से भरपूर आय अर्जित कर धान की खेती करने वाल किसानों को नई राह दिखाई है।
जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर गोंदिया रोड पर मुख्य सड़क से लगे ग्राम पेंडरई में देवेन्द्र नगपुरे केले की खेती करते हैं। इन्होंने कृषि संकाय में 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की है और पुस्तकों से मिले ज्ञान का उपयोग अब अपनी केले की खेती में कर रहे हैं। इन्हें उद्यान विभाग के अधिकारियों का मार्गदर्शन मिल रहा है। उद्यान विभाग ने इनके खेत
में अनुदान पर ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगवाया है। देवेन्द्र ने वर्ष 2016 में रायपुर से केले की जी-9 किस्म के पौधे लगाकर 2 एकड़ खेत में केले की फसल लगाई। इन्हें 9-10 माह में ही डेढ़ लाख रुपये की आय हो गई। कम रकबे की फसल से हुई आय ने देवेन्द्र को केले की खेती में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। वर्ष 2017 में इन्होंने केले की खेती का रकबा बढ़ाकर साढ़े तीन एकड़ कर लिया है। देवेन्द्र के खेतों में लगी केले की फसल में फल आने लगे हैं। इस वर्ष उन्हें कम से कम 5-6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।
अब देवेन्द्र आने वाले वर्ष में केले का रकबा बढ़ाकर 6 एकड़ तक करने की तैयारी कर रहे हैं। अब वह महाराष्ट्र के जलगांव के केले के पौधे लगायेंगे। इन्होंने पिछले साल अपने खेत में पत्तागोभी एवं मक्का की फसल भी लगाई और डेढ़ लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी पाई। इस वर्ष इन्होंने 10 क्विंटल अरहर की फसल भी ली है। देवेन्द्र ने खेती की नई तकनीक एवं नये तरीकों को सीखने के लिये इंडोनेशिया, सउदी अरब, उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद और अन्य देशों का भ्रमण भी किया है। वह अब भी हर वर्ष अपने दोस्तों के ग्रुप में कृषि के नये तरीके सीखने विदेश भ्रमण पर जाते हैं।
देवेन्द्र ने बालाघाट से लगे ग्राम कोसमी में फसलों के बीज, खाद, कीटनाशक दवा और अन्य कृषि आदान सामग्री की दुकान खोली है। किसानों को समय-समय पर जरूरी सलाह भी देते रहते हैं। प्रगतिशील किसान देवेन्द्र खेती से अपने परिवार के लिये आय अर्जित करने के साथ ही गांव के पांच अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे है। (खबरनेशन / Khabarnation)