आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने वाले पुत्र को मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व गृह मंत्री ही बचा रहे हैं ? 

राजनीति Mar 19, 2018

जब जबावदार लोग ही अपराधियों को बचाते हैं, तो उनके खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा ‘‘एक्शन’’ का राजनैतिक जुमला कितना सार्थक होगा ? 

भोपाल। गत् 16 मार्च, 18 को प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री रामपालसिंह के मदमस्त, शराबखोर और उदयपुरा (जिला रायसेन) निवासी प्रीति रघुवंशी से आर्य समाज मंदिर में विवाह करने वाले विवाहित पुत्र गिरजेश प्रतापसिंह के धोखे में आकर आत्महत्या करने वाली विवाहिता प्रीति रघुवंशी प्रकरण में कांग्रेस पार्टी का सीधा आरोप हैं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान और गृह मंत्री भूपेन्द्रसिंह ही अपने मंत्री और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने वाले उनके बिगड़ैल पुत्र को बचा रहे हैं! कांग्रेस जानना चाहती हैं कि जब आत्महत्या करने के बाद 36 घंटों तक मृतका का शव अस्पताल के शवदाह गृह में रखा रहा, आज 48 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रामाणिक दोषियों के विरूद्ध एफआईआर तक नहीं हुई हैं, तब उक्त तीनों जबावदेह प्रमुखों द्वारा ‘‘जांच चल रही हैं, पहले जांच हो जाने दो, सुसाईड नोट में किसी का नाम नहीं हैं’’ जैसे कहे जा रहे जुमलों का क्या अर्थ निकाला जाये? क्या मृतका ने दाऊद इब्राहिम के भय से आत्महत्या की हैं? कांग्रेस को इस बात पर भी गंभीर आपत्ति हैं कि हमेशा अपराधियों के पक्ष में खुले रूप से आकर उन्हें सदैव क्लीनचिट देने की फ्रेंचायजी रखने वाले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, जिन्हें पीडि़ता के परिवार से मिलकर सांत्वना देना था, वे कल रात (18 मार्च,18) आरोपित गिरजेश के मंत्री पिता   रामपालसिंह के शिवाजी नगर स्थित सरकारी आवास पर दो घंटे तक उन्हें कौन सी और किस प्रकार की सांत्वना देने गये थे? जिस तरह के कथन उक्त तीनों प्रमुखों के सामने आये हैं, क्या मंत्री-पुत्र की जगह आम व्यक्ति निशाने पर होता तो भी क्या वे यही कहते? 

कांग्रेस यह भी जानना चाहती हैं कि विधायक हेमंत कटारे प्रकरण में पीडि़ता से जेल में निरूद्ध होने के बाद भी लिखाई गई एक शिकायत पत्र के आधार पर यदि एफआईआर दर्ज हो सकती हैं, तब प्रीति रघुवंशी द्वारा की गई आत्महत्या और तमाम प्रमाणों के बावजूद अब तक एफआईआर भी नहीं लिखा जाना प्रदेश में कानून के राज की स्थापना को लेकर क्या दोहरा चरित्र नहीं हैं? यहां शिव-राज हैं.. या जंगल-राज?  

प्रदेश की लगभग ध्वस्त हो चुकी कानून-व्यवस्था को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंस में अपराधियों के खिलाफ ‘‘एक्शन......एक्शन......सिर्फ एक्शन......’’ के सरकारी जुमले पर भी तंज कसते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री खुद प्रभावी अपराधियों को बचाते हैं वे किस मुंह से ‘‘सिर्फ एक्शन..’’ लिये जाने की बात कह रहे हैं? वीडियो कांफ्रेंस में अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की बात को लेकर भी पार्टी मुख्यमंत्री से यह जानना चाहती हैं कि अधिकारियों को हटा देना उनका विशेषाधिकार हैं, किंतु उक्त अपराध में शामिल अपने सहयोगी मंत्री रामपालसिंह को मंत्री पद से न हटाने के पीछे उनकी कौन सी नैतिकता, मजबूरी और परेशानी नजर आ रही हैं? क्या प्रदेश में छोटी मछलियों और मगरमच्छों को लेकर दो कानून संचालित हो रहे हैं? कांग्रेस अपने इस गंभीर आरोप को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री से पूछना चाहती हैं कि क्या यह सच नहीं हैं कि हाल ही में मंत्री पद की शपथ लेने वाले जालमसिंह पटेल, पूर्व मंत्री व हरदा से निर्वाचित भाजपा विधायक कमल पटेल  के गंभीर अपराधों में शामिल पुत्रों और मयूर हत्याकांड में शामिल भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के पुत्र को बचाने के लिए उन्होंने ही तत्कालीन डीजीपी पर दबाव नहीं बनाया था? दोनों पटेलों के पुत्रों के विरूद्व गंभीर धाराओं में दर्ज प्रकरण से धाराऐं हटाने को नहीं कहा था? यह तो मात्र उदाहरण हैं, इसके अलावा भी ऐसे कई गंभीर प्रकरणों में उन्होंने ही आपराधिक चरित्र वाले आरोपियों की सीधी सहायता की हैं। 

कांग्रेस अपनी मांग को पुनः दोहराते हुए कहना चाहती हैं कि मंत्री के विवाहित आरोपित पुत्र के खिलाफ तत्काल भादसं की धारा-306, विधिवत शादी के उपरांत प्रीति रघुवंशी के साथ की गई धोखाधड़ी और मंत्री रामपालसिंह के विरूद्ध भी धारा-120 (बी) के तहत षड्यंत्र में शामिल होने का प्रकरण दर्ज किया जाये, क्योंकि मृतका की माता और भाई सिद्धार्थ द्वारा यह कहे जाने के बाद कि मंत्री ने फोन पर शादी खत्म करने, दूसरी शादी करने, दूसरी शादी का खर्च उठाने, यह प्रस्ताव नहीं मानने पर मृतका के पिता को नौकरी से निकलवा देने की बात खुद कही हैं। लिहाजा, मंत्री का यह कथन स्वतः सफेद झूठ के रूप में सामने आ चुका हैं कि मुझे विवाह से संबंधित जानकारी नहीं थी। (खबरनेशन / Khabarnation)

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