भावांतर योजना से किसान रामेश्वर की मुश्किलें हुईं आसान

भोपाल। देवास जिले में यदि किसी को भावांतर के लाभ के बारे में जानना है तो तहसील खातेगांव की ग्राम पंचायत साक्टया के कृषक रामेश्वर जाट से पूछे। रामेश्वर जाट का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी खेती का कार्य करता आ रहा है। उन्हें अनेकों बार खेती से होने वाले लाभ और हानि की धूप-छांव से गुजरना पड़ा है। किसी साल बंपर पैदावर तो किसी साल लागत भी नहीं निकलती थी। प्रकृति की मार अलग से झेलनी पड़ती थी। बंपर पैदावर हो तो मंडी में व्यापारी भाव ठीक नहीं देता था। कम पैदावर हो तो भाव तो अच्छा मिलता था, पर घर चलाना मुश्किल हो जाता था। काफी सालों से यही क्रम चल रहा था। जब भी फसल तैयार होती, बस यही पशोपेश चालू हो जाती कि भाव किस मंडी में ज्यादा मिलेगा। 

 

भावांतर भुगतान योजना शुरू होने से रामेश्वर जाट की यह पशोपेश खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भावांतर योजना में पूरे प्रदेश में एक साथ सोयाबीन, उड़द, मूंग, तुवर आदि फसलों के भाव का एक पैमाना तय कर दिया है। शुरू-शुरू में तो किसानों को यह योजना समझ में नहीं आई लेकिन बाद में स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों ने किसानों के लिये कार्यशाला आयोजित कर योजना की महत्ता के बारे में बताया। असली महत्व तब समझ में आया जब पंजीयन के बाद किसान मंडी प्रागंण गए। तब भाव तो व्यापारियों द्वारा निर्धारित ही मिला लेकिन भावांतर योजना में होने के कारण फसल की शेष राशि सीधे बैंक खाते में आ गई।

रामेश्वर ने 10 एकड़ में उड़द और शेष 14 एकड़ में सोयाबीन लगाया था। उड़द में 21.16 क्विंटल का मंडी में भाव 1406 रुपए प्रति क्विंटल के मान से मिला, जिसकी राशि 29 हजार 750 रुपए व्यापारी से प्राप्त हुई। इसी प्रकार सोयाबीन का भी भाव मंडी से प्राप्त किया। शेष दोनों फसलों की भावांतर राशि 62 हजार 402 रुपए सीधे उनके खाते में आ गई। रामेश्वर जाट मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए भावांतर योजना से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

ग्राम खल के ओमप्रकाश हरिराम ने भी अपने खेत में सोयाबीन लगाई थी। मंडी रेट तो व्यापारी से प्राप्त किए ही, बाकी भावांतर की राशि 1 लाख 8 हजार 179 रुपए सीधे खाते में प्राप्त किए। ओमप्रकाश को बारिश की खेंच से फसल थोड़ी कम जरूर मिली लेकिन भावांतर के कारण नुकसान से बच गए हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)

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