भाजपा ने आज शिक्षाविद्, चिन्तक, और जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती मनाई
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी “अमर रहे“ के नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद किया....
भाजपा सदस्यता अभियान का शुभारंभ कैलाश विजयवर्गीय ने किया.....
नेताप्रतिपक्ष गोपाल भार्गव शाम को सदस्यता अभियान कार्यक्रम में शामिल हुए
खबर नेशन/Khabar Nation
इंदौर. भारतीय जनता पार्टी नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा, महामंत्री मुकेशसिंह राजावत, गणेश गोयल एवं घनश्याम शेर ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा आज शिक्षाविद, चिंतक, जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसादजी मुखर्जी की 118 वीं जयंती विजय नगर स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मनाई। तत्पश्चात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय एवं नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा ,विधायक रमेश मेंदोला तथा सदस्यता अभियान प्रभारी कमल वाघेला, सहप्रभारी नानूराम कुमावत ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस.सी. वर्मा जो कि परम विशिष्ठ सेवा मेडल राष्ट्रपति से सम्मानित तथा राष्ट्रीय खिलाड़ी विश्वामित्र अवार्ड प्राप्त वेदप्रकाश जावला व कुश्ती के नेशनल खिलाड़ी श्री विजयकुमार भाटिया को आज इस अवसर पर भाजपा की सदस्यता देकर राष्ट्रव्यापी सदस्यता अभियान का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती है। जिन्होनें इस देश के अंदर पहला अांदोलन इस बात के लिये किया था, जब कश्मीर में धारा 370 लगी थी, आपने विरोध करते हुए कहा था कि एक देश में दो प्रधान, दो निशान और दो संविधान नहीं चलेंगे-नहीं चलेंगे, और इस नारे को लेकर जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध करते हुए उस समय जम्मू कश्मीर की सारी जेले भर दी गई थी। निश्चित रूप से आजादी के बाद देश की एकता और अखण्डता के लिये यह पहला आंदोलन था। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष थे। डॉ० मुखर्जी इस धारणा के प्रबल समर्थक थे कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम सब एक हैं। इसलिए धर्म के आधार पर वे विभाजन के कट्टर विरोधी थे। वे मानते थे कि विभाजन सम्बन्धी उत्पन्न हुई परिस्थिति ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से थी। वे मानते थे कि आधारभूत सत्य यह है कि हम सब एक हैं। हममें कोई अन्तर नहीं है। हम सब एक ही रक्त के हैं। एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है। परन्तु उनके इन विचारों को अन्य राजनैतिक दल के तत्कालीन नेताओं ने अन्यथा रूप से प्रचारित-प्रसारित किया। बावजूद इसके लोगों के दिलों में उनके प्रति अथाह प्यार और समर्थन बढ़ता गया।
भारतीय जनता पार्टी के देव पुरुष श्री मुखर्जी ने कश्मीर के लिए उपवास व लंबे समय तक संघर्ष किया। आज जिस ऊंचाई पर भाजपा खड़ी है और अनेक राज्यों में हमारी सरकार है, ये हमें मार्ग दिखाने वाले डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की ही सोच है। आपने कहा कि तात्कालिक सरकार की गलती से कश्मीर में इस तरह की विघटनकारी शक्तियों ने जन्म लिया एवं आधा कश्मीर पड़ोसी देश को चला गया। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का कश्मीर के लिए किया गया संघर्ष किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर कश्मीर को बचाने का प्रयास किया।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी प्रारंभ से ही प्रखर बुद्धि वाले व श्रेष्ठ वक्ता थे। उन्होंने अल्पायु में ही विद्याध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित की थी डॉ मुख़र्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धांतवादी थे। ब्रिटिश सरकार की भारत विभाजन की गुप्त योजना और षड्यन्त्र को कांग्रेस के नेताओं ने अखण्ड भारत सम्बन्धी अपने वादों को ताक पर रखकर स्वीकार कर लिया। उस समय डॉ० मुखर्जी ने बंगाल और पंजाब के विभाजन की माँग उठाकर प्रस्तावित पाकिस्तान का विभाजन कराया और आधा बंगाल और आधा पंजाब खण्डित भारत के लिए बचा लिया। गांधीजी और सरदार पटेल के अनुरोध पर वे भारत के पहले मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए।
नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा ने कहा कि उस समय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बहुत से गैर कांग्रेसी हिंदुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर देशहित में प्रगतिशील गठबंधन का निर्माण किया और चुनाव जीतकर उस सरकार में वे वित्त मंत्री बने। डॉ० श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। उसी समय वे सावरकर के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए।