मिलकर प्रयास करें, तभी अगली पीढ़ियों को दे पाएंगे समृद्ध जल विरासतः राकेश सिंह
खबर नेशन/Khabar nation
प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कहा कि पड़वार गांव में गौर नदी पर बना यह बांध एक छोटा प्रयास है। लेकिन यह बताता है कि अगर हम सब लोग आगे आएं, मिलकर जल संरक्षण के प्रयास करें, गांव-गांव में पानी रोकें तभी हम लगातार सूखती जा रही धरती की परतों को बचा पाएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक समृद्ध जल विरासत सौंप पाएंगे।
लगातार भयावह हो रहा जलसंकट
प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि मैं जल यात्रा एवं अन्य आयोजनों के माध्यम से 2011 से जल संरक्षण के प्रयासों में लगा हूं। मैंने उस समय भी यह कहा था और आज भी कह रहा हूं कि लोगों को जलसंकट की भयावहता का अहसास नहीं है, जो लगातार गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षा का 47 प्रतिशत पानी व्यर्थ चला जाता है, जिसे हम रोककर धरती के अंदर नहीं उतार पाते। इसके चलते भूमिगत जल लगातार कम होता जा रहा है। देश की आजादी के समय हमारे पास प्रत्येक व्यक्ति के लिए 5 हजार घनमीटर भू-जल उपलब्ध था, जो 2025 में सिर्फ 1500 घनमीटर रह जाएगा। 2050 तक तो प्रतिव्यक्ति 1000 घनमीटर भू-जल ही बचेगा।
हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे
राकेश सिंह ने कहा कि हमें यह विचार करना होगा कि मध्यप्रदेश में इतनी अच्छी वर्षा होती है, नदियों का जाल बिछा है, फिर भी मां नर्मदा के तट पर जलसंकट क्यों है? उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह है कि हम सरकार के भरोसे रहे, खुद कुछ नहीं किया और हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। हमारे पूर्वजों ने ऐसा नहीं किया, उन्होंने जल की एक समृद्ध विरासत हमें सौंपी थी। हमें खुद आगे बढ़कर जल संरक्षण के प्रयासों में भाग लेना होगा, जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाना होगा। जल संरक्षण के लिए छोटे-छोटे रूप में हम हर गांव में पानी रोकें।
पड़वार का डेम एक छोटा प्रयास
सिंह ने कहा कि पड़वार का गेबिनयन बोल्डर डेम एक छोटा प्रयास था, जिसे नौ दिनों में जनभागीदारी और जनसहयोग से तैयार किया गया। यह बताता है कि यदि हम हर गांव में जल संरक्षण के ऐसे प्रयास करें, तो भू-जल स्तर ऊपर उठेगा। श्री सिंह ने गौर नदी पर इस बांध के निर्माण में उनके साथ पसीना बहाने वाले सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि अकुशल हाथों से बनाया गया यह बांध तेज बारिश के बावजूद आज तक सुरक्षित है।