तो क्या शिवराज विदिशा चुनाव लड़ेंगे ?
खबरनेशन/Khabarnation
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान जिन्होंने प्रदेश पर 11 साल से भी ज्यादा हुकुमत की उनका राजनैतिक भविषय इस समय कुछ अंधकार मय नजर आ रहा है। इस तरह से कहने के पीछे बहुत सारे कारण हैं और इन में सब से प्रमुख है कि उन की भाजपा ही उन को विधान सभा चुनाव में हारने के बाद ठीक से तवज्जो नहीं दे रही है। यह तो सब को पता है कि विधान सभा में गोपाल भार्गव जो नये नेता प्रतिपक्ष बने हैं उन को चैहान पसंद नहीं करते थे।
चैहान को इस बात का अंदाजा ही नहीं रहा होगा कि भाजपा विधान सभा के चुनाव हार जायेगी। जब एक्जिट पोल में आया था कि भाजपा पीछे नजर आ रही है तब उन्होंने कहा था कि वो प्रदेश में जनता से मिलते हैं और इस कारण उन को अपनी पार्टी की जीत पर पूरा भरोसा है। परिणाम आने के दो दिन पहले तक उन को यह भरोसा था कि भाजपा ही चुनाव जीतेगी। वैसे इस बात से हैरान होने की ज्यादा कोई जरूरत इसलिये नहीं है क्योंकि जब भी किसी आदमी की कुर्सी चली जाती है तो उस के साथ इसी तरह का आचरण होता है।
वैसे तो अभी हाल ही में उन को भाजपा का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है पर यह कोई बहुत बडी बात नहीं है। उन के साथ ही छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है। तो अब भाजपा ने एक ही झटके में इन तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को बराबर ला कर खडा कर दिया है। इस के साथ ही यह भी कहना जरूरी है कि अब चैहान एक तरह से प्रभात झा के बराबर हो गये है क्योंकि प्रभात तो पहले से ही उपाध्यक्ष बने हुये हैुं।
अब यह कहा जा रहा है कि चैहान इसी साल में होने वाले लोक सभा चुनाव विदिशा से लडेंगे हालांकि यह भी बोला जा रहा है कि उन की इस चुनाव को लडने की कोई इच्छा नहीं है। वैसे तो चैहान ने कई बार यह कहा है कि वे मध्यप्रदेश में ही रह कर प्रदेश की सेवा मरते दम तक करेंगे पर अभी तो उन को नयी दिल्ली जाना ही होगा।