गंगा में ऐसा क्या की प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोविल छोड़ना नहीं चाहती और एसीएस विनोद कुमार कोई कार्यवाही करना नहीं चाहते
खबर नेशन / Khabar Nation
मध्य प्रदेश के मंत्रालय वल्लभ भवन में नियमों की तोड़फोड़
मंत्रियों विधायकों पर भारी एक क्लर्क
मध्यप्रदेश की राजनीतिक तासीर में अहम भूमिका निभाने वाले आदिम जाति कल्याण विभाग की एक मामूली क्लर्क मंत्रियों विधायकों पर भारी पड़ रही है। विभाग की प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोविल गंगा सोनी को छोड़ना नहीं चाहती और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार अपने ही आदेश का उल्लघंन करने वाली गंगा सोनी पर कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही करना नहीं चाहते । यह सीधा सीधा
मध्य प्रदेश के मंत्रालय वल्लभ भवन में नियमों की तोड़फोड़ का मामला है।
इस पूरे मामले में गौरतलब पहलू यह है कि सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार ऐसे ही मामले में मंत्रालय के दो कर्मचारियों को आदेश का पालन नहीं करने पर निलंबित कर चुके हैं।
मध्यप्रदेश के मंत्रालय में आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक अनुभाग अधिकारी गंगा सोनी का तबादला 21 दिसंबर 2022 को पशुपालन विभाग में कर दिया था। मंत्रालय में जिन अन्य कर्मचारियों के तबादला इस आदेश के साथ किए गए थे उन्हें तीन दिन के भीतर संबंधित विभाग में ज्वाइनिंग देना थी अन्यथा उन्हें एकतरफा रिलीव किये जाने के निर्देश थे।दो माह से उपर हो गये है गंगा सोनी ने न तो पशुपालन विभाग में ज्वाइनिंग दी है और न ही एकतरफा रिलीव किया गया है।
इसी आदेश में प्रकाश साधवानी सहायक अनुभाग अधिकारी का ट्रांसफर सामान्य प्रशासन विभाग ने उधानिकी विभाग से विमानन विभाग मे किया था । ज्वाइन ना करने पर साधवानी को 21.10.22 को निलंवित कर दिया गया । इसी प्रकार निशा गुप्ता को भी ज्वाइन ना करने पर ससपेंड किया गया । गंगा सोनी पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होना सोनी की ताकत का अहसास करा रहा है।
सूत्रों के अनुसार आदिम जाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोविल ने सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार को एक सामान्य पत्र लिखा था जिसमें गंगा सोनी को इस आदेश से मुक्त करने का जिक्र है। इसके बाद भी विनोद कुमार ने तबादला आदेश संशोधित नहीं किया है और न ही कोई कार्यवाही की है।
सूत्रों के अनुसार गंगा सोनी विगत छह सालों से आदिम जाति कल्याण विभाग में प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की स्थापना से संबंधित कार्य देखती है। जिसमें स्थानांतरण, समयमान वेतनमान, पदोन्नति, परिवीक्षा अवधि, गोपनीय प्रतिवेदन संबंधित कार्य आते हैं। गंगा सोनी पर आदिम जाति कल्याण विभाग के जिलों मे पदस्थ सहायक आयुक्त, जिला सयोजक ओर अन्य अधिकारी कर्मचारियों से स्थानांतरण ओर अन्य कार्यों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्री के नाम पर पैसो की मांग की जाती थी। इसकी शिकायत जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई थी ।
मध्यप्रदेश का आदिम जाति कल्याण विभाग का सबसे अधिक बजट है और इस विभाग के कई खर्चो को खुलेआम राजनीतिक अय्याशियों पर भी खर्च किया जाता है। जिसके चलते आदिवासी समाज आज भी पिछड़ा हुआ है।
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गौरव चतुर्वेदी
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