भाजपा शासित ज्यादातर राज्यों में स्थानीय निकाय के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से


खबर नेशन / Khabar Nation 
भोपाल, -
 
प्रदेश कांगे्रस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी एक बयान में बताया है कि मप्र कांगे्रस पार्टी की सरकार ने आज अपने कैबिनेट के फैसले में स्थानीय निकायों नगर पालिका निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से कराने का फैसला स्वागत योग्य है। तत्कालीन परिस्थितियों में यह अत्यंत आवश्यक हो गया था कि चुने हुये पार्षदगण अपने महापौर, अध्यक्ष प्रतिनिधि का चुनाव करें। बीते 15 वर्षों की भाजपा सरकार में अधिसंख्य भाजपा के स्थानीय निकाय के महापौर और नगर परिषद अध्यक्षों ने निरंकुश होकर भ्रष्टाचार किया और प्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर को चुनने की प्रक्रिया पर से लोगों की आस्था को आहत किया।

श्री दुबे ने कहा कि वर्तमान में देश में सिर्फ पांच राज्यों में ही प्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर चुना जाता है, जिसमें मध्यप्रदेश, झारखंड, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल है। इसके अलावा सभी भाजपा शासित राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटका इत्यादि में पार्षदगण अपना प्रतिनिधि महापौर या नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में चुनते हंै। इसलिए भाजपा को कांगे्रस सरकार के आज लिये गये निर्णय पर सवाल खड़ा करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता है।
श्री दुबे ने आगे बताया कि हिमालच प्रदेश में वर्ष 2010 में प्रत्यक्ष रूप से महापौर का चुनाव कराने का निर्णय लिया गया था, 2012 में हुये शिमला के चुनाव में महापौर सीपीएम का बना और 26 सदस्यों वाले काॅर्पोरेशन मंे 12 पार्षद भाजपा और 10 पार्षद कांगे्रस के जीते। ऐसी परिस्थितियां राजस्थान, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में निर्मित हुई, जिससे शहर का विकास प्रभावित हुआ और बाद में सरकार ने फिर से अप्रत्यक्ष रूप से महापौर का चुनाव प्रारंभ किया। कर्नाटका में तो महापौर का कार्यकाल सिर्फ एक वर्ष का होता है और वह भी अप्रत्यक्ष रूप से महापौर चुना जाता है। इसी प्रकार दिल्ली की तीनों नगर पालिका निगम नार्थ, साउथ और ईस्ट दिल्ली का चुनाव भी अप्रत्यक्ष रूप से होता है और वहां भी महापौर का कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
श्री दुबे ने बताया कि मप्र कांगे्रस सरकार का स्थानीय निकायों में महापौर, अध्यक्ष के चुनाव को लेकर हुआ आज का फैसला इन पदों की साख को पुर्नस्थापित करेगा। साथ ही यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 डब्ल्यु में राज्यों को अधिकार देता है कि वे स्थानीय निकाय की चुनावी प्रक्रिया कैसे निर्धारित करते हैं।

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