पतंग की तरह ऊँचाई पर जरुर जाएं लेकिन अपनेपन और भाईचारे की डोर कभी ना काटें
तिल गुड़ की मिठास आपसी संबंधों में घोलें और देश को सशक्त बनाएं ।
Khabar Nation / खबर नेशन
पुरे देश में मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, यह पर्व प्राचीनकाल से ही भारतवासियों के लिए आस्था, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। घरों में पकवान तिल्ली और गुड़ के लड्डू के साथ इस पर्व की पावन मिठास हमारी संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक है। यह पर्व हमारे घरों में बहन बेटियों को दान देने और पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भी जाना जाता है।
साथ ही यह पर्व हिन्दू मुस्लिम भाईचारे और अपनापन की भी मिसाल पेश करता है। रामू काका का लड़का भाई मियां के यहाँ दिनभर जाता है और पतंग और धागन उनसे तैयार करवाता है। हिन्दू मुस्लिम परिवार साथ में इस पर्व को मनाते आए है अनेंकों मुस्लिम परिवार हिन्दू भाइयों के लिए महीनों पहले से पतंग बनाना प्रारंभ कर देते है। पतंग उड़ाना और आपस में पेंच लड़ाना और सामने वाले की पतंग कट जाने जाने पर जोर से “काटा है- काटा है” चिल्लाना, यही इस पर्व का उल्लास है।
देश की मौजूदा केंद्र सरकार की विघटन कारी नीतियों के कारण लोगों में एक भय का माहौल बना है तथा यह स्थिति गंभीर है । भाईचारे और देश की गंगा जमुनी तहजीब में खलल डालने का एक घिनौना प्रयास किया गया है। लेकिन मेरे देशवासियों में अपनत्व की भावना है। आज भी रामू काका का बेटा, भाई मियां की दूकान पर गया है। में इस पावन पर्व पर यहीं अपील करना चाहता हूँ की आप अपने जीवन में पतंग की तरह नई ऊँचाइयों को छुएँ एक दुसरे की पतंग को पेंच लड़ाकर काटें लेकिन अपनेपन और भाईचारे की डोर को कभी ना कटने दें।
आप सभी को मकर संक्रांति पर्व की बहुत-बहुत बधाइयां एवं शुभकामनाएं ।