भारती श्रीवास्तव के चित्रों में स्त्री चेतना की अभिव्यक्ति
पहली एकल प्रदर्शनी दिल्ली में 28 सितंबर से
खबर नेशन / Khabar Nation
आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि स्त्री के हर काम में एक लय होती है और इस लय में खास तरह की कलात्मकता होती है। रसोई पकाने से लेकर दफ्तरी काम हो या कला का कोई अंग, स्त्री की भागीदारी एक चैतन्य उपस्थिति का द्योतक है। इस आधुनिक समय में जब स्त्रियों ने समाज में अपनी भागीदारी को सशक्तता से उभारा है, कला संसार मे भी यह हिस्सेदारी अधिक गहरी और व्यापक हुई है।
लंबी संघर्ष यात्रा के बाद रेखांकित हुई स्त्रियों की इस गाढ़ी उपस्थिति को युवा चित्रकार श्रीमती भारती श्रीवास्तव के चित्रों में स्पष्टता से देखा जा सकता है। भारती श्रीवास्तव को कला संस्कार अपनी माता और नाना से प्राप्त हए। माता स्व. इंदु श्रीवास्तव दमोह के जेपीबी स्कूल में प्रिंसिपल रहीं जबकि नाना स्व. बाला प्रसाद सिन्हा भोपाल में कला शिक्षक रहे हैं। भारती के पिता स्व. सीबीएल श्रीवास्तव दमोह की नगर पालिका में सीएमओ पदस्थ रहे। दमोह से विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद विवाह और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने कला कर्म को प्राथमिकता नहीं दी। मगर अपनी मम्मी को कागजों पर कुछ उकेरता देख तथा कला के प्रति उनके लगाव को महसूस कर बेटे रक्षित ने उन्हें फिर कूची थामने को प्रेरित किया। उन्हें पति श्री नरेश श्रीवास्तव का भरपूर साथ और सहयोग मिला।
इस सहयोग को अपनी ताकत बना भारती श्रीवास्तव ने कला से अपने जुड़ाव को उन्नत करने के लिए फाइन आर्ट्स में डीसीए से डिप्लोमा किया।
निरंतर अभ्यास से जारी कला यात्रा का सुफल है कि भारती को 2016 में ललित कला अकादमी में ग्रुप एग्जिबिशन लगाने का अवसर मिला। इस प्रयास को सराहना मिली। भारती ने 2017 में उचान आर्ट गैलरी व 2018 में 5 सितारा होटल शेरेटन , आईफैक्स आयोजित प्रदर्शनी में अपने कलाकर्म को प्रदर्शित किया है।
अब में 28 से 30 सितंबर 2019 को दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में तो अपने चित्रों को प्रदर्शित करने जा रही हैं। इस उनकी पहली एकल प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी से उत्साहित भारती बताती हैं कि इस एकल प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें अपना श्रेष्ठ कार्य कला मर्मज्ञों के बीच रखने का सु अवसर मिला है। उनके कला कर्म नारी को उसके विविध रूपों और भूमिकाओं में वर्णित करना है। भारती के चित्रों में स्त्री सशक्तिकरण और आधी आबादी के क्रियाकलापों को पूरे विन्यास से देखा जा सकता है। उनके चित्रों में रंगों का चयन जितनी सटीकता से हुआ है, स्त्री मनोभावों को भी उतनी ही बारीकी से उकेरा गया है।