मप्र मानव अधिकार आयोग द्वारा छह मामलों में संज्ञान
खबर नेशन / Khabar Nation
मप्र मानव अधिकार आयोग के माननीय सदस्य मनोहर ममतानी ने छह मामलों में संज्ञान लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है।
जेपी... चार आई सर्जन, फिर भी सालों से धूल खा रही हैं 24 लाख की दो मशीनें
सीएमएचओ व सिविल सर्जन जेपी अस्पताल भोपाल पंद्रह दिन में दें जवाब
भोपाल शहर के जेपी अस्पताल में मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुये स्वास्थ्य विभाग ने करीब दस साल पहले 24 लाख रूपये खर्च करके दो फेको मशीन खरीदी थीं। लेकिन इन मशीनों का उपयोग नहीं हो रहा है, जबकि जेपी अस्पताल में चार आई सर्जन पदस्थ हैं। दरअसल फेको तकनीक में मशीन से मोतियाबिंद की सर्जरी बिना चीरफाड़ लेजर के माध्यम से की जाती है। इसमें न सिर्फ समय कम लगता है, बल्कि सर्जरी भी बेहतर होती है। लेकिन जेपी अस्पताल के आई सर्जनों की मनमानी आलम यह है कि वे इन मशीनों को उपयोग ही नहीं करते हैं। यही वजह है कि जेपी अस्पताल में दिनभर में दो से तीन मरीजों की ही सर्जरी होती है, जबकि रोज दस-बारह मरीजों को सर्जरी की आवश्यकता होती है। बीते दिनों एक नए आई सर्जन ने फेको तकनीक से मरीजों का इलाज करने के लिये अस्पताल प्रबंधन से बात भी की थी, पर किसी ने भी उसे गंभीरता से नहीं लिया। मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल एवं सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल भोपाल से पंद्रह दिन में जवाब मांगा है। आयोग ने इन अधिकारियों से कहा है कि आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाना सुनिश्चित कर 15 दिन में जवाब दें, साथ ही यह भी बतायें कि बीते दस वर्षों से उपलब्ध ऐसी मशीनों की सुविधा मरीजों को उपलब्ध क्यों नहीं करायी जा सकी ?
गुंडे बदमाशों का अड्डा बना पोलोग्राउंड औद्योगिक क्षेत्र, साठ वर्षों में भी पानी न पहुंचा सका निगम
आयोग ने कहा - कमिश्नर इंदौर दो माह में दें जवाब
इंदौर शहर का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र पोलोग्राउंड आज भी पीने के पानी को मोहताज है। इस सबसे पुराने आद्योगिक क्षेत्र में साठ वर्षों बाद भी नगर निगम इंदौर पानी भी नहीं पहुंचा सका है। इस क्षेत्र में पानी की टंकी के निर्माण और पाइप लाईन बिछाने के लिये तीन करोड़ रूपये मंजूर हुये महीनों बीत चुके हैं। बावजूद इसके अबतक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पोलो ग्राउंड आद्योगिक क्षेत्र में कुछ अवांछित तत्वों ने सड़क किनारे अवैध निर्माण कर रखा है। उद्योगपतियों ने नगर निगम से शिकायत भी की, पर अबतक कुछ नहीं हुआ। क्षेत्र की दुकानों में नशे की सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस बारे में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा प्रोजेक्ट का कहना है कि उद्योग विभाग को इस क्षेत्र में पानी की टंकी बनाना और पाईप लाईन बिछाना है, इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है। हमें सिर्फ पानी उपलब्ध कराना है और कनेक्शन देना है। बहरहाल, समस्या अब भी बनी हुई है। मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने कमिश्नर, इंदौर संभाग से दो माह में जवाब मांगा है। आयोग ने कमिश्नर इंदौर से कहा है कि सभी संबंधित विभागों से समन्वय कर समुचित कार्यवाही कराकर पानी की मूलभूत सुविधा सबंधित क्षेत्रवासियों को यथाशीघ्र उपलब्ध करायें, तत्पश्चात् प्रतिवेदन दें।
मुख्य मार्गों पर खतरनाक गढ्ढे, चोटिल हो रहे वाहन चालक
आयोग ने कहा - निगमायुक्त ग्वालियर एक माह में दें जवाब
ग्वालियर शहर के जयेन्द्रगंज रोड़ पर गहरे गढ्ढ़ों के कारण वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। हर रोज इन गढ्ढों के कारण वाहन दुर्घटनाग्र्रस्त हो रहे हैं। राजीव प्लाजा होते हुये नदी गेट जाने वाले रास्ते पर गढ्ढों व सीवर के चेंबर धंस जाने के कारण वाहनों को भी नुकसान हो रहा है। इसी तरह हनुमान चैराहा से जीवाजीगंज मार्ग पर हालात काफी खराब हैं। यहां पर हर समय काफी ट्रैफिक रहता है, लेकिन नगर निगम अफसरों द्वारा मेंटेनेंस नहीं कराये जाने के कारण स्थिति काफी गंभीर है। लगातार इन ऊंची-नीची सड़क होने के कारण वाहन मालिक संतुलन नहीं बना पाते हैं और वाहन फिसलने केे कारण चोटिल हो जाते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब उसके सिटी संवाददाता ने फूलबाग, नया बाजार, तारागंज, लाला का बाजार, गश्त का ताजिया, फालका बाजार सहित शहर के कई मार्गों का जायजा लिया, तो वहां की स्थिति काफी खराब मिली। नगर निगम, ग्वालियर के अफसरों का कहना है कि जल्द ही इन सड़कों का मेंटेनेंस का काम शुरू किया जाना है। मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने नगर निगम आयुक्त, ग्वालियर से इन मार्गों के संबंध में समुचित कार्यवाही कराकर एक माह में जवाब मांगा है।
ग्वालियर के आनंद नगर में रहने वाले परिवार भारी गंदगी बीच रहने को मजबूर
आयोग ने कहा - कलेक्टर एवं निगमायुक्त ग्वालियर एक माह में दें जवाब
ग्वालियर शहर के वार्ड क्र. पांच में आने वाले आनंद नगर के सी ब्लॅाक के रहवासी नगर निगम की अनदेखी की वजह से परेशान हो रहे हैं। ब्लॅाक की अधिकतर जगहों पर सीवर का पानी भरा हुआ है। नगर निगम के अधिकारी ने जब कोई सुनवाई नहीं की तो यहां के निवासियों ने सीएम हेल्पलाइन में इसकी शिकायत की। वहां भी समस्या का निराकरण करने की बजाय गलत जानकारी देकर उस शिकायत को बंद करा दिया। निराकरण में लिख दिया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा नवीन सीवर लाइन की मांग की गयी है। शासन के निर्देशानुसार सीएम हेल्पलाइन में मांग का कार्य नहीं किया जा सकता है। सीएम हेल्पलाइन में इस कार्य की आपूर्ति किया जाना संभव नहीं है, इसलिए शिकायत बंद की जाती है। मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त, ग्वालियर से इस संबंध में जांच कराकर एक माह में जवाब मांगा है।
बाढ़ के बाद भुखमरी.....पलायन
आयोग ने कहा - कलेक्टर सागर एक माह में दें जवाब
सागर जिले में बेतवा नदी में आई बाढ़ के कारण जिले के 42 गावं के 575 मकान क्षतिग्रस्त हो गये। इनमें 57 मकान तो जमींदोज हो चुके हैं। इन मकानों में रहने वाले 2500 लोग दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। इनमें बच्चे, बूढे़, बीमार, अपाहिज एवं गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें से कुछ गांव छोड़कर जा रहे हैं, ताकि सागर, बीना, रायसेन, विदिशा, मंडीदीप और भोपाल में मजदूरी कर पेट भर सकें। वहीं जो गांव से नहीं जा पाए, वे भुखमरी का शिकार होने की कगार पर हैं। बीते 22 अगस्त के बाद बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया था। बीते 24 अगस्त को मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश बीना आए थे, जब बाढ़ पीड़ितों से चर्चा करते हुये उन्होंने सहायता राशि देने का आश्वासन देकर अफसरों को सर्वे के निर्देश दिये थे, लेकिन 53 दिन बाद भी जिला प्रशासन सभी पीडितों तक राशि पहुंचाने में नाकाम रहा। यहां तक कि अफसरों ने इन गावों में जाकर देखा तक नहीं कि ये लोग किस हालत में हैं। बीना के एसडीएम ने दावा किया है कि बीते सोमवार को क्षतिग्रस्त मकानों के पीड़ित 102 लोगों को राशि दे दी गई है। हालांकि पीड़ितों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर, सागर से एक माह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है। आयोग ने कलेक्टर, सागर से पूछा है कि 01. कितने परिवार/व्यक्ति प्रभावित हुये हैं ? 02. किस प्रकार की सहायता राशि व पुर्नवास आदि प्रस्तावित है ? 03. कितने परिवार/व्यक्तियों को राहत राशि प्राप्त हो चुकी है ? 04. कितने परिवार/व्यक्तियों को राहत राशि देना लंबित है?
मासूम को तालीबानी सजा: मोबाइल चोरी के शक में बच्चे को कुएं में लटकाया
आयोग ने एसपी छतरपुर से जवाब मांगा है
छतरपुर जिले के लवकुश नगर थाना की अक्टौहा चौकी में मोबाइल फोन चोरी के शक पर एक नाबालिग बच्चे को अमानवीय सजा देते हुये गहरे कुएं में लटकाया गया। आरोप है कि अक्टौहा चौकी की महिला प्रभारी ने बच्चे के साथ बेरहमी से मारपीट की और उनके कहने पर ही बच्चे को कुएं में लटकाया गया है। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बीते सोमवार को किसी व्यक्ति का मोबाइल चोरी हो गया था। इसकी सूचना अक्टौहां चौकी में दी गई। इसके बाद मोबाइल फोन चोरी के शक में एक बारह साल के बच्चे का पकड़ा। उसे गांव के एक व्यक्ति ने उसे गहरे कुएं में लटका दिया। बच्चा गिडगिडाता रहा कि उसने चोरी नहीं की, लेकिन किसी को उस पर रहम नहीं आया। इसी बीच वहां से गुजर रहे एक नाबालिग ने वीडियो बना लिया और पीड़ित बच्चे के माता-पिता को दिखा दिया। आरोप है कि पीडित बच्चे के साथ चौकी प्रभारी ने भी मारपीट की। उन्ही के कहने पर आरोपी ने बच्चे को कुएं में लटकाया था। चैकी प्रभारी ने आरोप को झूठा बताया है। मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक, छतरपुर से प्रकरण की जांच कराकर एक माह में जवाब मांगा है।
आयोग में शिकायत करने पर मृतक की धर्मपत्नी को मिले चार लाख रूपये
मप्र मानव अधिकार आयोग में शिकायत करने पर मंदसौर जिले की निवासी श्रीमती कमलाबाई को चार लाख रूपये का भुगतान मिल गया है। यह राशि उन्हें उनके पति मोहनलाल की कुएं में गिरने से पानी में डूबने से मृत्यु हो जाने पर मुआवजा राशि के रूप में मिली है। मामला कुछ यूं है कि ग्राम मिठठनखाड़ी, तहसील भानपुरा, जिला मंदसौर निवासी ईश्वरलाल पिता मौजीलाल ने आयोग में आवेदन लगाकर उसके बड़े भाई मोहनलाल की हत्या कर लाश को कुएं में डाल देने, पुलिस थाना भानपुरा द्वारा शिकायत दर्ज नहीं कर समुचित जांच की कार्यवाही नहीं करने की शिकायत की थी। शिकायत मिलते ही आयोग ने प्रकरण क्रमांक 8523/मंदसौर/2021 दर्ज कर लिया। आयोग ने मामले की निंरतर सुनवाई की। इस पर कलेक्टर, मंदसौर ने आयोग को रिपोर्ट दी है कि आवेदक की शिकायत पर कार्यवाही कर मृतक मोहनलाल की धर्मपत्नी श्रीमती कमलाबाई राजस्व पुस्तक परिपत्र 6(4) के प्रावधान के तहत चार लाख रूपये मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया गया है। चूंकि आवेदक की शिकायत का निराकरण हो गया है, अतः आयोग में यह मामला अब समाप्त कर दिया गया है।
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गौरव चतुर्वेदी
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