स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आत्म निर्भर बन रहे युवा

 

 

खबरनेशन/Khabarnation                                                                                                                                                                                                                                   भोपाल :  पढ़ने-लिखने के बाद जरूरी नहीं है कि नौकरी के पीछे ही भागा जाये। नौकरी के पीछे भागने से अच्छा है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर अपना स्वयं का व्यवसाय आरंभ किया जाये। अनेक युवाओं ने इस बात को सच साबित किया है।

बालाघाट जिले के ग्राम कैंडाटोला के युवा तरूण घोरमारे ने मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना का लाभ लेकर अपना स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ किया और हर माह 25 हजार रुपये आय अर्जित कर रहा है। तरूण को यूनियन बैंक से योजना में वर्ष 2017 में 3 लाख रुपये का ऋण मिला है। इस राशि से उसने कैंडाटोला-बिरसा में अपनी स्वयं की रेडीमेड कपड़ों की दुकान खोली है।

रायसेन जिले के ग्राम रतनपुर निवासी आकाश कुमरे ने नौकरी नहीं मिलने पर स्वयं का रोजगार शुरू करना बेहतर समझा। इसके लिए जिला अंत्यवसायी कार्यालय में सायबर कैफे तथा जिम खोलने के लिए आवेदन दिया। मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में आकाश को दो लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। आकाश को ऋण पर योजना में प्रदेश सरकार द्वारा 30 प्रतिशत सब्सिडी भी मिली। आकाश ने इस राशि से जिम और सायबर कैफे शुरू किया। सायबर कैफे में फोटोकापी, एमपी ऑनलाइन तथा टाइपिंग का कार्य किया जा रहा है। अपने कारोबार में आकाश ने अन्य व्यक्ति को भी रोजगार दिया है। कारोबार में लगभग प्रति माह 15 हजार रुपये कमा रहा हैं आकाश।

शिवपुरी जिले की बदरवास निवासी श्रीमती पारूल अग्रवाल पत्नी श्री राहुल अग्रवाल ने खादी ग्रामोद्योग की स्व-रोजगार योजना में जैकेट बनाने का स्वयं का रोजगार स्थापित किया है। इस कारोबार में पारूल लगभग 90 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। बदरवास में पारूल का 'बिट्टू गारमेंट फर्म' नाम से प्रसिद्ध जैकेट प्रदेश में ही नहीं, बल्कि अन्य प्रदेशों में भी लोगों की पहली पसंद बन गया है। ये जैकेट गुणवत्ता एंव फिटिंग के मामले में किसी भी बड़ी ब्राण्डेड कंपनी से कम नहीं है।

पारूल के जैकेट व्यवसाय में प्रतिदिन लगभग 1600 जैकेट बनते हैं। उत्पादन के सभी खर्चे काटने के बाद भी पारूल को प्रति जैकेट 15 से 20 प्रतिशत मुनाफा होता है। अपने व्यवसाय में वह लोगों को प्रति माह 7 से 9 हजार रुपये तनख्वाह भी देती है।

 

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