आदिवासी-वनवासी ग्रामों में सड़कें बनने से विकास का मार्ग प्रशस्त
भोपाल। आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले में दुर्गम एवं पहाड़ी इलाकों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्की सड़कों का निर्माण किया जा रहा हैं। उमरिया जिले का सीमावर्ती ग्राम कल्दा भी पक्की सड़क से जुड़ गया हैं। अब कल्दा से बिछिया मार्ग लंबाई 16 किमी से किशनपुरा, अमवारी, मझौली, बंधवाटोला, टकटई, महोबादादर, कोलौनी एवं बिछिया ग्राम भी विकास की मुख्य धारा में जुड़ गये हैं। इस मार्ग के निर्माण से लगभग 20 हजार लोगों के जीवन की राहें आसान हो गई हैं। ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी सभी मूलभूत सुविधाऐं आसानी से मिल पा रही हैं।
ग्रामीण चरकू यादव ने बताया कि 6 वर्ष पूर्व तक सब लोग सड़क निर्माण नही होने के कारण आधुनिक सुविधाओं से वंचित थे। किसी व्यक्ति के बीमार हो जाने पर आवागमन के साधन नहीं होने से कई बार वह व्यक्ति गांव में ही या रास्ते में दम तोड़ देता था। इसी तरह, गांव के बच्चे कक्षा 8 तक की शिक्षा ही प्राप्त कर पाते थे। आवागमन मार्ग नहीं होने के कारण गांव में पैदा होने वाली कृषि उपज , सब्जी भाजी तथा दूध आदि का व्यवसाय भी आसान नहीं था। गिने चुने लोग ही पाली एवं मंगठार में पहुंचकर अपनी उत्पादित कृषि उपज से आय अर्जित कर पाते थे।
महेश कुमार ने बताया कि यह पूरा क्षेत्र दुर्गम पहाड़ी इलाका हैं। यहाँ की यात्रा आसान नहीं थी। अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि भी यहाँ यदा-कदा ही भ्रमण करते थे। बरसात के दिनों में तो यहां की यात्रा अत्यन्त कठिन थी। सड़क बन जाने से अब हम विकास की मुख्य धारा से जुड़ गये हैं। सभी को अपनी क्षमता के अनुसार विकास के अवसर मिले हैं।
आदिवासी एवं वनवासी क्षेत्रों में सड़क एवं पुलिया बन जाने से सरपट वाहन दौड़ने लगे हैं, गंभीर बीमारी की हालत में 108 कॉल करने पर गाँव तक एंबुलेंस आती हैं। मरीज को जिला चिकित्सालय तक कम समय में पहुँचा देती हैं। शाम तक घर वापसी भी हो जाती हैं।
ग्राम कल्दा निवासी नंदू बैगा ने बताया कि सड़क बनने पर पता चला कि गर्भवती महिलाओं को प्रसूति हेतु सरकार ने 108 चलाई हैं। अब तो घर तक 108 आकर जल्दी ही अस्पताल पहुँचा देती हैं। दो दिन बाद जच्चा-बच्चा घर वापस सकुशल आ जाते हैं, कोई परेशानी नहीं होती, ऊपर से 1400 रू. का चेक भी साथ में मिलता हैं। डामर रोड बनने से बरसात के दिनो मे भी गेहूं चावल, मिट्टी का तेल सरकारी उचित मूल्य दुकान से सहजता पूर्वक लाते हैं। किसानों ने फसलों की बुवाई के लिए शहर से अच्छे किस्म के बीज एवं खाद लाकर खेती के तौर-तरीके बदले हैं, जिससे कृषि की उत्पादकता भी बढ़ी हैं।
ग्राम कल्दा निवासी रामलाल का कहना हैं कि सड़क बन जाने से गाँव में बड़े स्तर पर लोग पशुपालन से जुड़कर रोजगार पा सके हैं। सड़क निर्माण होने से लाभांवित ग्रामवासियों में अत्यंत उत्साह देखने को मिल रहा हैं। अब भारत का नव-निर्माण गांवों मे भी शुरू होता दिखाई दे रहा हैं। सड़क बन जाने से गावं की तस्वीर एवं ग्रामवासियों की तकदीर बदली हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)