उद्यानिकी फसलों से किसानों ने खेती को बनाया लाभ का धंधा

भोपाल। परम्परागत गेहूँ, धान, चना, मसूर की फसलों के अलावा टमाटर, प्याज, ककड़ी और सेब सहित अन्य सब्जी और फलों की फसलों से किसान खेती को लाभ का धंधा बनाने में कामयाब हो रहे हैं। पॉली हाउस, जैविक खाद, ड्रिप इरीगेशन जैसी आधुनिक पद्धत्ति अपना कर प्रगतिशील कृषकों ने फसलों के उत्पादन में भी रिकार्ड बनाया हैं। मध्यप्रदेश में अब किसान एक-दूसरे को परम्परागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। 

बालाघाट जिले के लांजी विकासखण्ड के बेनेगांव के कृषक भाई नरेन्द्र, दिनेश और सुरेन्द्र को विरासत में जो खेती मिली, उससे बमुश्किल परिवार के लिए दो टाइम के भोजन की व्यवस्था हो पाती थी। पूरा परिवार संघर्ष के दौर से गुजर रहा था। तीनों भाईयों ने अपने-अपने हिस्से की खेती में परम्परागत धान के स्थान पर बेगन, टमाटर, मिर्ची, भिंडी, पालक, चौलई, उड़द की खेती शुरू की। खेतों में नये-नये प्रयोग किए। दिनेश एवं नरेन्द्र ने बताया कि उन्होंने नया प्रयोग करते हुए बैगन के पौधों के बीच में उड़द की फसल लगाई। सभी भाई सब्जियों की खेती में इतने पारंगत हो गये हैं कि बैगन, टमाटर मिर्ची, भिंडी और अन्य सब्जियों की विभिन्न प्रजातियों के नाम उन्हें मुंह-जुबानी याद हैं।

अब सभी भाई अपने खेतों में पैदा फसल स्वयं लांजी एवं आसपास के साप्ताहिक हाट-बाजारों में बेचते हैं। सभी बच्चों को पढ़ा रहे हैं और सम्मानजनक जीवन यापन कर रहे हैं। 

रतलाम जिले में पिपलौदा विकासखण्ड के ग्राम कुशलगढ़ के कृषक कुशल पाटीदार विगत 5 सालों में अपने पॉली हाउस की ककड़ी (खीरा) की फसल बेचकर लगभग 25 लाख रूपये की आमदनी अर्जित कर चुके हैं। कुशल ने वर्ष 2013 में पहला पॉली हाउस लगाया था। पॉली हाउस में लगातार खीरे की फसल लेते रहे। इसी बीच उनके पॉली हाउस की संख्या भी बढ़ती चली गई हैं। अब उनके पास 14 हजार वर्गमीटर में 7 पॉली हाउस हैं।

कुशल पाटीदार बताते हैंकि खेती को वैज्ञानिक ढंग और मेहनत के साथ किया जाए तो खेती कभी-भी घाटे का सौदा नहीं होती हैं। कुशल पाटीदार पॉली हाउस में गुलाब के फूलों की खेती भी करते हैं। गुलाब के फूल बेचकर भी उन्होंने लाखो रूपये कमाए। अब वे प्रतिवर्ष पॉली हाउस में ककड़ी की खेती कर रहे हैं, इसके लिए रोटेशन में ककड़ी की फसल पॉली हाउस में लगाते हैं। उनके सातों पॉली हाउसों में क्रमबद्ध तरीके से ककड़ी की फसल सालभर पैदा होती हैं। शिवपुरी जिले के महेशपुरा निवासी कृषक वायसराम ने एक एकड़ में 62 क्विंटल गेहूँ की जैविक खेती का रिकार्ड उत्पादन किया हैं। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने शिवपुरी में आयोजित खण्डस्तरीय अंत्योदय मेले में किसान बायसराम को सर्वाधिक उत्पादन लेने पर आत्मा परियोजना के तहत 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)

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