आमदनी बढ़ाने के लिये किसान अपना रहे हैं कृषि से जुड़े अन्य कार्य

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें परम्परागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी और कृषि से जुड़ी अन्य व्यवसायिक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा हैं। जिन किसानों ने उद्यानिकी फसलों को अपनाया हैं, आज वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं और उन्होंने समाज में अपनी विशेष पहचान बनाई हैं।

रतलाम जिले का सिमलावदा गाँव उद्यानिकी खेती के लिए मशहूर हैं। इंदौर-नीमच हाईवे पर बसे इस गाँव के किसानों ने नई-नई कृषि तकनीक अपनाकर जिले में अपनी अलग पहचान बनाई हैं। इस गाँव के प्रगतिशील किसान रामविलास पाटीदार ने इस साल अमरूद की फसल बेचकर 3 लाख 50 हजार रुपये कमाये हैं। इन्होंने अपनी पाँच बीघा जमीन में अच्छी गुणवत्ता वाला वी.एन.आर हाईब्रिड अमरूद लगाया था। वे अपने खेत में ड्रिप ऐरिगेशन का इस्तमाल भी कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में उत्पन्न अमरूद दिल्ली की आजाद मण्डी में भी बेचे हैं। किसान रामविलास अब मिर्ची,टमाटर,मटर अदरक और गुलाब के फूलों की खेती भी कर रहे हैं। उन्हें पॉली हाउस लगाने के लिये राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी मिला हैं।

सतना जिले के नागौद विकासखण्ड के ग्राम उमरहट के शिक्षित किसान शिवेन्द्र प्रताप सिंह वर्षों से परम्परागत खेती करते आ रहे हैं। खेती में सीमित रह गई आमदनी की समस्या पर उन्होंने उद्यानिकी अधिकारियों से चर्चा की। तत्पश्चात उन्होंने सब्जी और फूलों की खेती करने का मन बनाया। उद्यानिकी अधिकारियों के मार्गदर्शन में अपनी कृषि भूमि पर 14 लाख रुपये लागत का 200 वर्ग मीटर एरिया में शेडनेट तैयार किया। इसमें उन्होंने शिमला मिर्च की खेती की। शेडनेट हाउस में गुलाब की भी खेती कर चुके हैं। शिवेन्द्र अब अपनी आमदनी बढ़ाने के लिये प्याज भण्डारण गोदाम भी तैयार करवा रहे हैं। उन्हें इसके लिए राज्य सरकार की योजनाओं में ऋण के साथ अनुदान भी मिला हैं।

देवास जिले में अब महिलायें भी खेती-किसानी में आगे आ रही हैं। ग्राम चुरलाय की महिला किसान मानकुंवर बाई राजपूत ने जैविक खेती को अपनाकर जिले में अपनी विशष्ट पहचान बनाई हैं।

जैविक खेती से मानकुंवर बाई की आय में वृद्धि हुई हैं। उनके खेत में जैविक खेती को देखकर गाँव के अन्य लोगों ने भी जैविक खेती को अपनाया हैं। मानकुंवर बाई ने खेती के अलावा सामाजिक क्षेत्र में भी भाग लिया हैं। उन्होंने गाँव के गरीब बच्चों को गणवेश सहित जूते भी नि:शुल्क वितरित किये हैं। मानकुंवर बाई को किसान कल्याण विभाग द्वारा सर्वोत्तम किसान के रूप में पुरस्कृत किया जा चुका हैं। (खबरनेशन / Khabarnation)
 

Share:


Related Articles


Leave a Comment